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Ravidas Jayanti 2024: कब है संत रविदास की जयंती? यहां पढ़ें उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें..

Ravidas Jayanti 2024: सनातन धर्म के पंचांग के अनुसार, प्रत्येक साल माघ पूर्णिमा ​के दिन रविदास जयंती मनाई जाती है। इस बार संत रविदास जी की जयंती 24 फरवरी को मनाई जाएगी। इस पावन अवसर के दिन रविदास जी की पूजा होती है। इस दौरान उनकी शोभा यात्राएं निकाली जाती हैं और भजन कीर्तन कर ...

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By: DNP न्यूज़ डेस्क

Published: फ़रवरी 22, 2024 1:06 अपराह्न

Ravidas Jayanti 2024
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Ravidas Jayanti 2024: सनातन धर्म के पंचांग के अनुसार, प्रत्येक साल माघ पूर्णिमा ​के दिन रविदास जयंती मनाई जाती है। इस बार संत रविदास जी की जयंती 24 फरवरी को मनाई जाएगी। इस पावन अवसर के दिन रविदास जी की पूजा होती है। इस दौरान उनकी शोभा यात्राएं निकाली जाती हैं और भजन कीर्तन कर उनको याद किया जाता है। वहीं, संत रविदास, गुरू रविदास, रैदास और रोहिदास जैसे कई नामों से जाना जाता है।

संत रविदास को बहुत धार्मिक स्वाभाव का बताया गया है। वे भक्तिकालीन संत और महान समाज सुधारक थे। उन्होंने भगवान की भक्ति में समर्पित होने के साथ-साथ अपने सामाजिक और पारिवारिक कर्तव्यों का भी बखूबी निर्वहन किया। संत रविदास जी ने लोगों को बिना भेदभाव के आपस में प्रेम करने की शिक्षा दी और इसी तरह से वे भक्ति के मार्ग पर चलकर संत रविदास कहलाए।

Ravidas Jayanti 2024 पर उनके बारें में?

माना जाता है, कि संत रविदास के माता पिता चर्मकार थे। उनका जन्म वाराणसी के पास के एक गांव में हुआ था। संत रविदास जी के पिता का नाम संतोखाद और माता का नाम करमा देवी था। वहीं, उनकी पत्नी का नाम लोना और पुत्र का नाम श्रीविजयदास बताया गया है।

Ravidas ने पैतृक कार्य को अपनाया

वहीं, बताया गया है कि, रविदास जी ने अपनी आ​जीविका के लिए पैतृक कार्य को अपनाया, लेकिन इनके मन में भगवान की भक्ति पूर्व जन्म के पुण्य से ऐसी रची बसी थी कि, आ​जीविका को धन कमाने का साधन बनाने की बजाय संत सेवा का माध्यम बना लिया।

Ravidas Ji के पास थीं अलौकिक शक्तियां

रविदास जी के बारे में बताया गया है कि, बचपन से ही उनके पास अलौकिक शक्तियां थीं। बचपन में अपने दोस्त को जीवन देने, पानी पर पत्थर तैराने, कुष्ठ रोगियों को ठीक करने समेत उनके चमत्कार के कई किस्से प्रचलित हैं।

संत रविदास भगवान की पूजा आराधना करते थे

वहीं, बताया गया है कि, संत रविदास जी अपना अधिकांश समय भगवान की पूजा-आराधना में लगाया करते थे। साथ ही धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए, उन्होंने एक संत का दर्जा प्राप्त किया।

कई दोहे बताए जो आज भी प्रसिद्ध

उन्होंने कई ऐसा दोहे बताए जो आज भी प्रसिद्ध हैं। जिसमें ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’, रविदास जी का ये दोहा आज भी बहुत प्रसिद्ध है। साथ ही रविदास जी का कहना था कि, शुद्ध मन और निष्ठा के साथ काम करने का परिणाम हमेशा अच्छा मिलता है।

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