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Vijaya Ekadashi 2024: मार्च में किस दिन मनाई जाएगी विजया एकादशी? ऐसे करें भगवान विष्णु की आराधना

Vijaya Ekadashi 2024: सनातन धर्म में एकादशी तिथि को महत्वपूर्ण माना गया है। हर माह में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की एकादशी ति​थि को भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा और व्रत करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग एकादशी के दिन भगवान श्री हरि का आर्शीवाद ...

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By: DNP न्यूज़ डेस्क

Published: फ़रवरी 28, 2024 12:42 अपराह्न

Vijaya Ekadashi 2024
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Vijaya Ekadashi 2024: सनातन धर्म में एकादशी तिथि को महत्वपूर्ण माना गया है। हर माह में कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की एकादशी ति​थि को भगवान विष्णु और धन की देवी माता लक्ष्मी की पूजा और व्रत करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग एकादशी के दिन भगवान श्री हरि का आर्शीवाद प्राप्त करते हैं। उनकी भगवान विष्णु सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

वहीं, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी व्रत सूर्योदय से शुरू होता है और इसके अगले दिन द्वादशी तिथि पर सूर्योदय के बाद समाप्त होता है। तो चलिए इस ले​ख के माध्यम से आपको मार्च में पड़ने वाली एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में बताते हैं..

Vijaya Ekadashi 2024 की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Vijaya Ekadashi 2024 की तिथि

फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी कहा जाता है। हिंदू केलेंडर के अनुसार, विजय एकादशी तिथि की शुरूआत 6 मार्च को सुबह 6 बजकर 30 मिनट से होगी। वहीं, अगले दिन यानि 7 मार्च को सुबह 4 बजकर 13 मिनट पर तिथि का समापन हेागा। तो ऐसे में एकादशी व्रत 6 मार्च को मनाया जाएगा।

Vijaya Ekadashi 2024 पर इस तरह से करें भगवान विष्णु की पूजा

  • विजया एकादशी ति​थि पर गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें। इसके बाद आचमन कर अपने आप को शुद्ध करें।
  • भगवान विष्णु को पीला रंग अति प्रिय है। तो इस दिन पीले वस्त्र धारण करें। अब सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • अब भगवान को फूल चढ़ाए, धूप द्विप दिखाएं और ​नियम से पूजा करें। पीले रंग का फल, फूल और मिठाई पूजा में जरूर शामिल करें। इसके बाद दीपक जाकर आरती करें।
  • आरती के बाद विष्णु भगवान की चालीसा का पाठ करें। इसके पश्चात ईश्वर से जीवन में सुख और शांति की कामना करें।
  • अंत में भगवन को फल, मिठाई और खीर का भोग लगाएं। भागे में तुलसी दल को अवश्य शामिल करें और लोगों में प्रसाद बांट दें।

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