Heavy Period Bleeding: पीरियड में हैवी ब्लीडिंग होना कुछ लोग सामान्य मानते हैं। काफी फीमेल को तो पता ही नहीं चल पाता है कि, उनकी महामारी ठीक नहीं चल रही है। जिसकी वजह से भविष्य में उन्हें गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसी परेशानी से बचने के लिए महिला रोगी विशेषज्ञ डॉक्टर प्रिया बता रही हैं।
Heavy Period Bleeding क्या होती है?
महामारी में हद से ज्यादा रक्त निकलने के बारे में महिला डॉक्टर का कहना हैकि, हर 25 से 35 दिन के अंतराल में पीरियड्स आना चाहिए। जब ये माहवारी में गड़बड़ी हो जाती है और ब्लीडिंग
ज्यादा होने लगती है।
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कई बार महिलाएं समझ नहीं पाती हैं ब्लीडिंग उन्हें हैवी हो रही है या कम। वैसे तो 60 मिलीलीटर ब्लड का निकलना नॉर्मल माना जाता है। एक बार में 80 मिलीलीटर से ज्यादा ब्लड अगर निकल रहा है तो ये बिल्कुल भी नॉर्मल नहीं होता है। इसके साथ ही कुछ महिलाओं के खड़े होते ही तेजी से ब्लड निकलने लगता है। वहीं, इसमें थक्के भी आते हैं। अगर 2 से 3 घंटे में सैनेटरी पैड बदलने की नौबत आ रही है तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए। क्योंकि इससे उनकी हेल्थ खराब हो सकती है। वहीं, पीरियड की डेट बदलना भी इस गड़बड़ी का इशारा देती है।
हैवी ब्लीडिंग का इलाज
डॉक्टर का कहना है कि, हैवी ब्लीडिंग होने के कुछ कारण होते हैं। जिन्हें बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए। पीरियड हद से ज्यादा होने का एक कारण थायराइड माना जाता है। हार्मोनल असंतुलन, बच्चेदानी में गांठ, पॉलीप्स और एनीमिया होते हैं। जब किसी महिला और लड़की को हैवी ब्लड की समस्याएं होती हैं तो डॉक्टर बल्ड टेस्ट के साथ पेल्विक जांच, अल्ट्रासाउंड ,एंडोमेट्रियल बायोप्सी और हिस्टोस्कोपी के साथ एमआरआई भी करा सकते हैं।अगर आपको भी कमजोरी, चक्कर और आयरन की कमी हो रही हैं तो महिला डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।
Disclaimer: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सीय परामर्श केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। ऐसे किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।






