Sleep Apnea : रात में सोते हुए अगर आपकी सांस भी बार-बार अटकती है या फिर बहुत अधिक खर्राटे आते हैं तो सावधान हो जाएं क्योंकि ये जानलेवा हो सकता है। इसकी जानकारी फेफड़े रोग विशेषज्ञ और मेदांता के डॉक्टर रणदीप गुलेरिया दे रहे हैं। इस स्थिति को स्लीप एपनिया कहा जाता है।उनका कहना है कि, इस में ऑक्सीजन का स्तर अचानक कम हो जाता है, जिससे दिल और दिमाग जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर भारी दबाव पड़ता है। अधिक लापरवाही होने पर मरीज की जान तक जा सकी है।
Sleep Apnea क्या है और इससे कारण
डॉक्टर रणदीप गुलेरिया का कहना है कि,स्लीप एपनिया सिर्फ़ खराब नींद नहीं है। ये सेहत के लिए एक गंभीर खतरा है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। मेदांता के डॉक्टर रणदीप गुलेरिया बताते हैं कि कैसे एपनिया दिमाग को ऑक्सीजन को कम करके जान ले सकता है। अगर इसके लक्षणों को पहचान लिया जाए तो इलाज संभव है। सांस रुकने से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बहुत नीचे गिर जाता है।
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इससे कारण अचानक ब्लड प्रेशर भी प्रभावित होता है। जिससे मरीज को हार्ट स्ट्रोक और अटैक आ सकता है।स्लीप एपनिया ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया, सेंट्रल स्लीप एपनिया और कॉम्प्लेक्स स्लीप एपनिया तीन तरह के होते हैं। यह समस्या तब होती है जब नींद के दौरान गले के पिछले हिस्से की मांसपेशियां जरूरत से ज्यादा ढीली हो जाती हैं और सांस लेने की नली बंद हो जाती है।इसके प्रमुख कारण अत्यधिक मोटापा, टॉन्सिल्स या एडेनोपिड्स का बढ़ना , धूम्रपान, शराब और हमेशा क्रोनिक साइनस के कार नाक का बंद होना है।
स्लीप एपनिया का इलाज
हेल्थ एक्सपर्ट कहना है कि, स्लीप एपनिया का इलाज संभव है। इसमें सबसे पहले पॉलीसोमनोग्राफी टेस्ट किया जाता है। ये रात में मरीज के ऑक्सीजन लेवल को चेक करता है। इससे बचने के लिए एक मास्क लगाया जाता है। इससे
गले की मांसपेशियां ठीक रहती हैं और सांस की नली पूरी रात खुली रहती है। स्थिति बिगड़ने पर कई बार मरीज को BiPAP मशीन दी जाती है। सोने की पॉजिशन को बदलकर भी ठीक किया जा सकता है। वहीं, नशीली चीजों को छोड़कर भी इसे ठीक किया जा सकता है। हद से ज्यादा स्थिति बिगड़ने पर जबड़े की सर्जरी की जा सकती है।
Disclaimer: यह लेख और इसमें दी गई चिकित्सीय परामर्श केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है। यह किसी भी तरह से किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इस लेख में बताए गए तरीकों और दावों को केवल सुझाव माना जाना चाहिए; डीएनपी इंडिया हिंदी न तो इनकी पुष्टि करता है और न ही खंडन करता है। ऐसे किसी भी सुझाव/उपचार/दवा/आहार का पालन करने से पहले हमेशा डॉक्टर से सलाह लें।






