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Meningitis: शरीर को इस तरह कूड़ा करता है दिमागी बुखार, जानें लक्षण से लेकर इलाज तक

दिमागी बुखार में वक्त रहते पता न चल पाए तो हालात बद से बद्दतर हो जाते हैं. ऐसे में इसके बारे में जानकारी होना और भी जरूरी हो जाता है, आज आपको इसी खास फीवर के बारे में डीटेल में बताने जा रहे हैं.

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By: Deepika Pandey

Published: अक्टूबर 8, 2023 1:05 अपराह्न

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Meningitis: मौसम बदलने के साथ बुखार का आना एक सामान्य बात है, शरीर में कुछ भी बदलाव होता है जिसकी जानकारी बुखार या दूसरे संकेतों के जरिए मिलती है. मगर हर बुखार एक जैसा नहीं होता. मेनिनजाइटिस भी एक खास तरह का बुखार है जो दिमाग में होता है, वक्त रहते अगर इस बारें में पता न चल पाए तो हालात बद से बद्दतर हो जाते हैं. ऐसे में इसके बारे में जानकारी होना और भी जरूरी हो जाता है, आज आपको इसी खास फीवर के बारे में डीटेल में बताने जा रहे हैं.

क्या होता है दिमागी बुखार

आपको बता दें कि मेनिनजाइटिस को दिमागी बुखार के नाम से भी जाना जाता है, यह सीधे तौर पर दिमाग पर असर डालता है, इसमें माइंड के अंदरूनी हिस्सों में सूजन आने लगती है. हर गुजरते दिन के साथ मरीज की हालत खराब होने लगती है. यह बीमारी कुछ काफी खतरनाक रूप ले सकती है इसलिए समय रहते इसके बारे में पता लगाना काफी जरूरी होता है ताकि बेहतर तरीके से इसका ईलाज किया जा सके. नीचे इसके कुछ लक्षण भी बताए जा रहे हैं-

दिमागी बुखार के शरीर में दिखने वाले लक्षण

मेनिनजाइटिस बीमारी के कोई भी खास लक्षण नहीं है. इसके होने पर सिर में दर्द, बुखार आना, उल्टी, मितली, शरीर में कमजोरी होना होता है. धीरे-धीरे यह बीमारी भयानक रूप लेने लगती है जिसमें मरीज के लिए परेशानी बढ जाती है. ऐसा कुछ भी होने पर डॉक्टर के पास जाकर जांच जरूर करा लेनी चाहिए.   

दिमागी बुखार से कैसे बचा जा सकता है

यहां यह जान लेना काफी जरूरी है कि मेनिनजाइटिस या कहें दिमागी बुखार संक्रमण से होने वाली बीमारी है जो एक दूसरे से फैलती है. ऐसे में खुद को बचाना और भी जरूरी हो जाता है. नीचे कुछ बचने के तरीके बता रहे हैं ताकि यह न हो.
1.बाहर आते जाते समय मास्क का इस्तेमाल किया जा सकता है.

2.दिन में कई बार साबुन या सेनिटाइजर के इस्तेमाल से इस संक्रामक बीमारी से खुद को बचाया जा सकता है.

3.कितना भी कर लें मगर हमारे हाथों में कुछ न कुछ जम्स रह ही जाते हैं इसलिए बार-बार मूंह पर हाथ लगाने से बचना चाहिए.

4.पर्सनल हाइजिन पर खासतौर पर ध्यान देना चाहिए ताकि किसी भी तरह की बीमारियों से खुद का बचाव किया जा सके.

5.वहीं सबसे जरूरी है कि बीमारी में कुछ वक्त तक सही न होने पर डॉक्टर के पास जाकर अपनी जांच करा लेनी चाहिए. ताकि शरीर से जुड़ी किसी भी बीमारी के बारे में पता लगा लिया जाए.

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों को केवल जानकारी के रूप में लें। DNP News Network/Website/Writer इनकी पुष्टि नहीं करता है। इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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