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Ectopic Pregnancy से जुड़े इन लक्षणों को महिलाएं भूलकर भी ना करें इग्नोर, ऐसे केस में इस तरह से करें उपचार

Ectopic Pregnancy: प्रेगनेंसी का समय हर महिला के लिए बेहद ही अच्छा समय होता है। यह जितना खूबसूरत होता है उतनी ही महिला को परेशानी भी झेलनी पड़ती है। लेकिन ऐसा हर किसी महिला के साथ नहीं होता। कुछ महिलाएं ऐसी होती है जो गर्भावस्था के दौरान अपनी सेहत का बेहद ख्याल रखती हैं। इस ...

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By: Anjali Sharma

Published: जनवरी 24, 2023 1:42 अपराह्न

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Ectopic Pregnancy: प्रेगनेंसी का समय हर महिला के लिए बेहद ही अच्छा समय होता है। यह जितना खूबसूरत होता है उतनी ही महिला को परेशानी भी झेलनी पड़ती है। लेकिन ऐसा हर किसी महिला के साथ नहीं होता। कुछ महिलाएं ऐसी होती है जो गर्भावस्था के दौरान अपनी सेहत का बेहद ख्याल रखती हैं। इस समय में कई ऐसी समस्याएं हो जाती हैं जिनका समय पर इलाज न होने से ये गंभीर समस्या का रूप ले लेती हैं। ऐसी ही एक समस्या एक्टोपिक प्रेगनेंसी की है। आइए जानते हैं कि इसके लक्षण और उपचार क्या है।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी क्या है

एक्टोपिक प्रेगनेंसी में फर्टिलाइजर एग गर्भाशय से नहीं जुड़ता। बल्कि वह फैलोपियन ट्यूब, एब्डोमिनल कैविटी गर्भाशय ग्रीवा से जाकर जुड़ता है। इसे अस्थानिक गर्भाशय भी कहा जा सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक्टोपिक प्रेगनेंसी 50 में से एक महिला को होती है। जानते हैं कि इसके लक्षण क्या है।

एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण

  • पेट खराब होना
  • उल्टी होना हल्की
  • हल्की ब्लीडिंग या तेज ब्लडिंग होना
  • पेट में ऐंठन
  • चक्कर आना
  • कमजोरी होना
  • बहुत ज्यादा पसीना आना
  • त्वचा का पीला पड़ जाना
  • बेहोशी
  • कंधे, गर्दन या गुदा में दर्द होना

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एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के प्रमुख कारण

  • फैलोपियन ट्यूब में सूजन आना
  • हार्मोन्स का असंतुलन होना
  • फर्टिलिटी दवाओं के सेवन या आईवीएफ कराना
  • 35 साल के बाद प्रेग्नेंट होना
  • किसी कारण से ट्यूब का खराब हो जाना
  • फर्टिलाइजर एग के असामान्य विकास
  • पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिजीज

एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के उपचार

एक्टोपिक प्रेगनेंसी की जांच डॉक्टर तब करते हैं जब गर्भाशय के दौरान बार-बार दर्द का एहसास होता है। डॉक्टर्स पेल्विक परीक्षा करवाते हैं साथ ही अन्य जांच भी कराते हैं। एक्टोपिक प्रेगनेंसी के दौरान रक्त संचार में एचजीसी के स्तर का पता लगाया जाता है। एचजीसी एक ऐसा हार्मोन है, जो गर्भाशय के दौरान ही उत्पन्न होता है। यदि इसका स्तर बहुत ज्यादा है तो एक्टोपिक प्रेगनेंसी के लक्षण दिखाई देते हैं। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड और सोनोग्राफी के जरिए भी इसकी जांच की जा सकती है। अल्ट्रासाउंड के दौरान पता लगता है कि फैलोपियन ट्यूब में भ्रूण है या नहीं। इसके अलावा सोनोग्राफी के जरिए गर्भाशय की जांच की जाती है।

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Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों को केवल सुझाव के रूप में लें, DNP INDIA न्यूज़ इनकी पुष्टि नहीं करता है। इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

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Anjali Sharma

अंजलि शर्मा पिछले 2 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रही हैं। अंजलि ने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल अंजलि DNP India Hindi वेबसाइट में कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रही हैं।
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