Shaheed Diwas: भगत सिंह और लाहौर षडयंत्र केस की वो बातें… जिनसे दुनिया आज तक अनजान रही, इन्हें जानकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ खून खौल उठेगा

Shaheed Diwas: वायसराय इरविन ने लाहौर षडयंत्र मामले में सुनवाई में तेजी लाने के लिए एक विशेष न्यायाधिकरण का गठन किया। इस मुकदमे की भारत और ब्रिटेन दोनों ने अन्यायपूर्ण करार देते हुए कड़ी निंदा की गई थी। इसके बावजूद 7 अक्टूबर, 1930 को न्यायाधिकरण ने 300 पन्नों का फैसला सुनाया गया था। जिसमें हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी के तीन सदस्यों का नाम था। इसमें भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को मौत की सजा सुनाई गई। इसके बाद उन्हें 23 मार्च, 1931 को फांसी दे दी गई।

Shaheed Diwas

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Shaheed Diwas: भारत में 23 मार्च को शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगत सिंह और उनके साथी क्रांतिकारियों सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु की फांसी की याद में मनाया जाता है। जिन्हें 1931 में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या के लिए लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दी गई थी। Bhagat Singh का जन्म 28 सितंबर 1907 को लायलपुर जिले के बंगा गाँव में हुआ था, जो अब वर्तमान पाकिस्तान में फ़ैसलाबाद का हिस्सा है।

वे एक वीर क्रांतिकारी थे जिन्हें 1931 में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या के लिए सिर्फ़ 23 साल की उम्र में फांसी पर लटका दिया गया था। भगत सिंह के विचारों ने देश भर के देशभक्तों को हमेशा प्रेरित किया है और आगे भी करते रहेंगे। Shaheed Diwas में, आइए भगत सिंह और लाहौर षडयंत्र केस के बारे में जानें।

भगत सिंह और लाहौर षडयंत्र केस का मुकदमा

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