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Premanand Maharaj: ‘कामवासना’ नहीं छोड़ रही पीछा तो क्या करें?’ गुरु प्रेमानंद ने दे दिया ठोस सुझाव; बस करना होगा ये काम

Premanand Maharaj: 'कामवासना' एक ऐसा भाव है जो सजीव वस्तुओं के भीतर पाया जाता है। इसमें प्रमुखत: मनुष्यों के भीतर आने वाले 'वासना' भाव पर चर्चा होती है। कई ऐसे सार्वजनिक मंच हैं जहां लोग खुलकर अपनी बात रखते हैं और समस्या का निदान पाते हैं।

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By: Gaurav Dixit

Published: दिसम्बर 6, 2024 4:09 अपराह्न

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Premanand Maharaj: ‘कामवासना’ एक ऐसा भाव है जो सजीव वस्तुओं के भीतर पाया जाता है। इसमें प्रमुखत: मनुष्यों के भीतर आने वाले ‘वासना’ भाव पर चर्चा होती है। कई ऐसे सार्वजनिक मंच हैं जहां लोग खुलकर अपनी बात रखते हैं और समस्या का निदान पाते हैं। ऐसा ही एक मंच है वृंदावन में लगने वाला प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) का दरबार। गुरु प्रेमानंद महाराज के दरबार में हजारों की संख्या में अनुयायी अपने मन में उपज रहे तमाम सवालों का जवाब जानने की कोशिश करते हैं।

सवालों से परेशान एक ऐसा ही शख्स गुरु प्रेमानंद (Guru Premanand) महाराज के दरबार में पहुंचा और पूछा कि “भगवान की भक्ति करते हैं तो बहुत अच्छे भाव प्रकट होते हैं। आंखों से आंसू आते हैं। मन बहुत रोता है। भक्ति करते-करते सभी बुरी आदते छूट गईं पर इस शरीर से वासना खत्म नहीं हो रही है। इस स्थिति में क्या करें?” प्रेमानंद ने बड़े तार्किक अंदाज में सवाल पूछने वाले शख्स को सुझाव दिया जिसके बारे में हम आपको बताएंगे।

Premanand Maharaj ने बताया ‘कामवासना’ से पीछा छुड़ाने का उपाय!

भजन मार्ग के आधिकारिक यूट्यूब चैनल से एक वीडियो जारी किया गया है। वीडियो में गुरु प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) को ‘कामवासना’ से पीछा छुड़ाने का उपाय बताते सुना जा सकता है।

यहां देखें वीडियो

प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि “कामवासना छोटी-मोटी हस्ती नहीं है, बहुत बड़ा शत्रु है। ये बहुत ऊंचाई तक रहता है, बहुत वर्षों तक रहता है। जब तक भगवान का साक्षात्कार न हो जाए तब तक रहता है। 20, 50 वर्ष की साधना होने के बाद भी ये (कामवासना) नष्ट नहीं होता, तरंग की तरह सूक्ष्म रहता है। भगवान का दर्शन होते ही यह खत्म हो जाता है। 20-50 वर्ष के ब्रह्मचर्य को भी कामवासना भ्रष्ट कर देगा। ये बहुत बड़ा शत्रु है और ये भगवत बल से संपन्न है, साधारण नहीं है।”

प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि “भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र के रूप में जन्मा ये (प्रद्यूम्न जी) कामवतार है। ये भगवत स्वरूप है। काम से सावधान रहना है बस, साल दो साल की भक्ति से ये नहीं भाग जाएगा। ये पास ही रहेगा आपके और जब तक भगवत साक्षात्कार नहीं होगा तब तक ये बना रहेगा। इसलिए डरना नहीं है। ये आपको भ्रष्ट नहीं करेगा, बल्कि आपका सहयोग करेगा। ये डरा-डराकर आपको भगवान की शरण में पहुंचाएगा। ऐसे लोगों से दूरी बनाओ जिनसे भाव बिगड़ चुका है या बिगड़ने की संभावना है। चाहें स्त्री हो या पुरुष, जब भी कोई भगवत प्राप्ति का लक्ष्य करेगा, माया इन्हीं दोषों के द्वारा उन्हें भ्रष्ट करने के लिए व्यवस्था पुष्ट करती है।”

कामवासना से पीछा छुड़ाने के लिए इस सुझाव पर करें असम!

गुरु प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) कहते हैं कि “लाखों में कोई एक ऐसा है जो ऐसे कहेगा कि गलत नहीं करेंगे। संयोग या क्रिया न बनने पाए इसका ख्याल रखना होगा। पत्नी के साथ सहवास गलत नहीं है, लेकिन पराई स्त्री के साथ कभी अवसर भी मिले तो उसे ना कहें। यदि ये बात आप अपने दिमाग में रखोगे तो आप सफल हो सकोगे अन्यथा आपको असफलता हाथ लगेगी। आप सत्संग सुनें और भगवान के नाम का जप करें, ये दो चीजें तुम्हें गिरने नहीं देंगी और सही मार्ग पर आगे बढ़ने में मददगार साबित होंगी।”

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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