Anurag Dhanda: आप संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बता दें कि केजरीवाल ने कथित शराब घोटाले से जुड़ी कानूनी लड़ाई को नया रूप दे दिया है। दरअसल याचिका खारिज होने के बाद अब आप संयोजक ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल के माध्यम से एक वीडियो जारी किया। गौरतलब है कि इसी वीडियो को सीएम मान समेत कई बड़े नेता शेयर कर रहे है। इसी बीच अब आप के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी Anurag Dhanda ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।
Anurag Dhanda ने अरविंद केजरीवाल का वीडियो किया शेयर
आप नेता अनुराग ढांडा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि “जब न्याय के दरवाज़े बंद होने लगें तो गांधी जी के सिखाए सत्याग्रह से ही सच्ची लड़ाई लड़ी जा सकती है।
जब न्याय के दरवाज़े बंद होने लगें तो गांधी जी के सिखाए सत्याग्रह से ही सच्ची लड़ाई लड़ी जा सकती है।
ये अकेले @ArvindKejriwal की नहीं हर उस इंसान की लड़ाई है जो इंसाफ़ में भरोसा करता है।#KejriwalKaSatyagraha https://t.co/KvJsrpLNx0
— Anurag Dhanda (@anuragdhanda) April 27, 2026
ये अकेले अरविंद केजरीवाल की नहीं हर उस इंसान की लड़ाई है जो इंसाफ़ में भरोसा करता है”।
अरविंद केजरीवाल ने न्यायमूर्ति को लिखा पत्र
आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि “अत्यंत विनम्रता और न्यायपालिका के प्रति पूर्ण सम्मान के साथ, मैंने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को निम्नलिखित पत्र लिखा है, जिसमें मैं उन्हें सूचित कर रहा हूँ कि सत्याग्रह के गांधीवादी सिद्धांतों का पालन करते हुए, मेरे लिए उनकी अदालत में इस मामले को स्वयं या किसी वकील के माध्यम से आगे बढ़ाना संभव नहीं होगा।
In all humility and with complete respect for judiciary, I have written the following letter to Justice Swarna Kanta Sharma, informing her that pursuing Gandhian principles of Satyagraha, it won’t be possible for me to pursue this case in her court, either in person or through a… pic.twitter.com/HmyOyNYug8
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) April 27, 2026
मैंने यह कठिन निर्णय इस स्पष्ट निष्कर्ष पर पहुँचने के बाद लिया है कि उनकी अदालत में चल रही कार्यवाही किसी भी तरह से इस मूलभूत सिद्धांत को संतुष्ट नहीं करती कि ‘न्याय न केवल होना चाहिए बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए’। इन कार्यवाही में मेरी भागीदारी, चाहे मैं स्वयं या किसी वकील के माध्यम से, कोई सार्थक उपलब्धि नहीं होगी”।






