Bengal Elections 2026: तुष्टिकरण की राजनीति के आरोप जमकर लग रहे हैं। बीजेपी अपने प्रतिद्वंदी टीएमसी को सत्ता से बेदखल करने को आतुर है। ये हालात पश्चिम बंगाल के हैं जहां 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में कुल 294 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है। इसको लेकर तैयारियां जारी हैं। टिप्पणीकार अपने-अपने हिस्से का अनुभव साझा कर बंगाल इलेक्शन 2026 पर पक्ष रख रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं। इनमें 112 ऐसी सीटें हैं जिन पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका मे हैं। अंक गणित के लिहाज से यहां समीकरण टीएमसी के लिए अनुकूल है। ये सीटें मुर्शिदाबाद, नदिया, उत्तर 24 परगना, मालदा, दीनाजपुर आदि जिलों से आती हैं। 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां टीएमसी को जीत मिली थी। उसी के आधार पर हम आपको सूबे का सियासी समीकरण बताने की कोशिश करेंगे।
100 से अधिक सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की निर्णायक भूमिका!
देश के जाने-माने पत्रकार और लेखक समीर चौगांवकर ने बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के संदर्भ में अपने अनुभव साझा किए हैं।
पश्चिम बंगाल के 294 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 148 सीटों की जरूरत है।
बंगाल में 112 सीट ऐसी है,जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में रहते हैं और इन 112 सीटों में से 106 ममता बनर्जी के पास हैं।
अंक गणित के लिहाज से समझें तो ममता बनर्जी को शेष 182 हिंदू-बहुल…— sameer chougaonkar (@semeerc) April 6, 2026
वरिष्ठ पत्रकार की मानें तो बंगाल की कुल 294 में से 112 ऐसी सीटें हैं जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका मे हैं। फिलहाल की बात करें तो इन 112 में से 106 सीटों पर टीएमसी की कब्जा है। यानी आशय साफ है कि 2021 विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं ने खुलकर ममता बनर्जी को समर्थन दिया था। ममता बनर्जी को 182 हिंदू बहुल सीटों में से 109 सीटों पर जीत मिली थी। यही वजह रही कि टीएमसी ने वर्ष 2021 में 215 सीट जीतकर इतिहास रचा था।
मुस्लिम बहुल सीटों पर नजर डालें तो यहां बीजेपी को पूर्णत: निराशा हाथ लगी थी। मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण 24 परगना और बीरभूम जैसे मुस्लिम बहुल जिलों से आने वाली सीटों पर टीएमसी को एकतरफा जीत मिली थी। इन क्षेत्रों में 89 ऐसी विधानसभा सीटें हैं जहां मुस्लिम मतदाताओं की आबादी 30 फीसदी से अधिक है। इनमें से 87 सीटों पर टीएमसी के उम्मीदवार जीते थे। ऐसे में ये स्पष्ट दर्शाता है कि मुस्लिम मतदाता ममता बनर्जी के साथ थे।
हालांकि, अबकी बार हुमायूं कबीर ने टीएमसी की सदस्या छोड़ अपनी पार्टी बना ली है। मुर्शिदाबाद में बाबरी जैसी नई मस्जिद का निर्माण शुरू है। मुसलमानों के नेता असदुद्दीन ओवैसी भी हुमायूं कबीर के साथ बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि मुस्लिम बहुल सीटों का समीकरण क्या होता है। 4 मई को चुनावी नतीजों की घोषणा के साथ इन सभी सवालों के जवाब मिल जाएंगे।
अंक गणित के लिहाज से क्या है Bengal Elections 2026 का समीकरण?
हालिया सियासी समीकरण को देखें तो बंगाल की सभी 294 विधानसभा सीटों पर टीएमसी-बीजेपी आमने-सामने खड़ी है। दोनों दलों के बीच सत्ता हासिल करने की सीधी लड़ाई है। 2021 विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 215 सीटें जीत कर बंगाल की सत्ता पर एकतरफा कब्जा जमाया था। वहीं बीजेपी को 77 सीटें मिली थीं और पार्टी मुख्य विपक्ष की भूमिका में आई थी। हालांकि, 77 सीट मिलना भी बीजेपी के लिए बड़ी उपलब्धि थी।
ऐसा इसलिए कहा गया क्योंकि 2016 बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी महज 3 सीटों पर सिमट गई थी। हालांकि, तब और अब में परिस्थिति बिल्कुल अलग है। बीजेपी बहुमत का आंकड़ा यानी 148 सीट लाने के लिए पूर्णत: प्रयासरत है। टीएमसी भी इस फेहरिस्त में जोर कस रही है। ऐसे में 4 मई को नतीजों की घोषणा के साथ ये देखना दिलचस्प होगा कि अंक गणित के लिहाज से किसका समीकरण सरकार बनाने के अनुकूल होता है।






