Bihar Politics: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इन दिनों सुर्खियों में रहे हैं। बीते सोमवार को उन्होंने बिहार विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया। जदयू प्रमुख का यह कदम राज्यसभा में उनकी सीट पक्की होने के कुछ ही दिनों बाद आया है। जो बिहार की राजनीति में एक शांत लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार के लिए यह कदम महज़ एक सामान्य बदलाव से कहीं ज़्यादा मायने रखता है।
जेडीयू प्रमुख का पटना से दिल्ली की ओर रुख करना, बिहार की राजनीति में एक लंबे दौर के बाद “नीतीश युग” के संभावित अंत का संकेत देता है और एक नए नेतृत्व के संभावित उदय की ओर इशारा करता है। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य के बीच भाजपा मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा ठोकने के लिए तैयार नज़र आ रही है। वह इस भूमिका के लिए अपने ही किसी नेता का समर्थन कर सकती है। इन सबके बीच, राजद अपने पूर्व राजनीतिक सहयोगी जदयू और उसके सर्वोच्च नेता नीतीश कुमार पर भावनात्मक कटाक्ष करके सियासी माहौल को गरमाने के लिए सक्रिय रूप से आक्रामक रुख अपना रही है।
क्या नीतीश कुमार ने अपने इस्तीफे पर खुद हस्ताक्षर नहीं किए?
मालूम हो कि राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीते सोमवार को बिहार विधान परिषद के पद से इस्तीफा दे दिया था। अब, इस इस्तीफे पर बिहार में एक राजनीतिक विवाद शुरु हो गया है। राजद एमएलसी सुनील सिंह ने परोक्ष रूप से इस्तीफे वाले पत्र पर किए गए हस्ताक्षर की जाँच की माँग की है। उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट के ज़रिए इस मामले पर औपचारिक रूप से अपना पक्ष रखा। राजद एमएलसी सुनील सिंह ने मंगलवार को फेसबुक पोस्ट में लिखा है, “छोटे पद का भी इस्तीफा ऑथराइज्ड पर्सन के सामने देना होता है। इस्तीफा पत्र पर हस्ताक्षर असली है या नकली इसकी जांच होनी चाहिए।”

हालाँकि, राजद एमएलसी ने अपने पोस्ट में किसी भी नेता का नाम साफ़ तौर पर नहीं लिया, लेकिन उनके व्यंग्यात्मक टिप्पणियों को व्यापक रूप से हाल के घटनाक्रमों से जोड़कर देखने पर राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बिहार विधान परिषद से इस्तीफे की ओर ही लक्षित माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, इस पूरी मामले की शुरुआत तब हुई जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का त्याग पत्र लेकर संजय गांधी बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह के सामने हाजिर हुए। इस्तीफा देने स्वयं नीतीश कुमार नहीं बल्कि उनके बदले संजय गांधी सभापति को मुख्यमंत्री का त्याग पत्र सौंपा। बताया जा रहा है कि इसी बात के आधार पर राजद ने नीतीश के इस्तीफे पर सवाल उठाना शुरु कर दिया है। बता दें कि विधान परिषद के सभापति द्वारा नीतीश कुमार का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के साथ ही बिहार विधान परिषद में जदयू प्रमुख का 20 साल लंबा सफर समाप्त हो गया। वह 2006 से लगातार बिहार विधान परिषद के सदस्य थे।






