Jharkhand News: झारखंड में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने और उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधा देने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ऊर्जा विभाग के अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने राज्य में 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ऊर्जा क्षेत्र की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य में बिजली कटौती की समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
आज बिजली विभाग की समीक्षा बैठक में उपस्थित अधिकारियों को दिशा निर्देश दिया कि “बिजली सभी की मूलभूत जरूरत है। राज्य के लोगों को चौबीस घंटे निर्बाध बिजली देने के प्रयासों में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए ग्रिड, ट्रांसमिशन लाइंस, पावर सब स्टेशन, ट्रांसफार्मर, स्मार्ट ग्रिड, स्मार्ट मीटर, आदि के इंस्टॉलेशन को तेज गति से बढ़ाने का काम करें।
आज बिजली विभाग की समीक्षा बैठक में उपस्थित अधिकारियों को दिशा निर्देश दिया कि –
– बिजली सभी की मूलभूत जरूरत है। राज्य के लोगों को चौबीस घंटे निर्बाध बिजली देने के प्रयासों में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके लिए ग्रिड, ट्रांसमिशन लाइंस, पावर सब स्टेशन, ट्रांसफार्मर,… pic.twitter.com/cGH7sp2KUn
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) July 29, 2026
विभाग अगले 10-15 साल की जरूरत को देखते हुए प्लान बनाए और सबमिट करे। विभाग में जेई, एई, आदि सभी जरूरी नियुक्तियों को शीघ्र भरने का काम करें। राज्य में रिजर्वायर एवं अन्य क्षेत्रों तथा स्रोतों में एनर्जी जेनरेशन एवं एनर्जी स्टोरेज की संभावनाओं को तलाशने के लिए फ़ेसिबिलिटी स्टडी करें, तथा रिपोर्ट सबमिट करें”।
नए ग्रिड और पावर सब स्टेशनों को स्थापित
राज्य में रिजर्वायर एवं अन्य क्षेत्रों तथा स्रोतों में एनर्जी जेनरेशन एवं एनर्जी स्टोरेज की संभावनाओं को तलाशने के लिए फ़ेसिबिलिटी स्टडी करें, तथा रिपोर्ट सबमिट करें। राज्य में सौर ऊर्जा, रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन की गति को तेज करने का काम करें। ग्रामीण क्षेत्रों में पावर जेनरेशन की संभावनाओं को सीएमइजीपी योजना के साथ बढ़ाने का प्लान सबमिट करें।
मानकों के हिसाब से जरूरी ग्रिड और पावर सब स्टेशनों को स्थापित करने का प्लान सबमिट करें। ट्रांसमिशन लाइंस में मोनोपोल का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने की ओर बढ़े, इससे भूमि की जरूरत भी कम रहेगी।







