Middle East Crisis: कांग्रेस में अंदरखाने नेताओं के बगावती रुख पर चर्चा तेज हो गई है। ताजा प्रकरण पूर्व केन्द्रीय मंत्री आनंद शर्मा और पूर्व सीएम कमलनाथ के बयान से जुड़ा है। इन दोनों दिग्गज कांग्रेस नेताओं ने मिडिल ईस्ट क्राइसिस पर मोदी सरकार की तारीफ कर राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
इससे पूर्व शशि थरूर और मनीष तिवारी जैसे कांग्रेस सांसदों ने ऑपरेशन सिंदूर पर पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी की थी। इसी क्रम में अब फिर दो अन्य दिग्गज कांग्रेसी नेताओं का बदलता रुख शीर्ष नेतृत्व को परेशानी में डाल सकता है। ये कांग्रेस के लिए आत्मचिंतन का दौर है जब अपने ही दिग्गज नेताओं के स्टैंड पार्टी लाइन से विपरीत जा रहे हैं।
Middle East Crisis पर दिग्गज कांग्रेसी नेताओं की दो टूक से सनसनी!
मध्य प्रदेश के सीएम व कई बार केन्द्रीय मंत्री रहे कमलनाथ ने मिडिल ईस्ट क्राइसिस पर भारत में स्थिति सामान्य बताई है। जहां एक ओर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल समेत तमाम कांग्रेसी नेता देश में महंगाई और एलपीजी संकट का मुद्दा उठा रहे हैं। वहीं कमलनाथ ने कहा कि देश में एलपीजी की कोई किल्लत नहीं है।
The situation in West Asia following the unjustified US – Israel attack on Iran and its retaliatory response has resulted in a global upheaval and economic disruption of grave enormity. (1/11)
— Anand Sharma (@AnandSharmaINC) April 2, 2026
पूर्व विदेश मंत्री आनंद शर्मा ने भी मिलती-जुलती प्रतिक्रिया साझा की है। उनका कहना है कि मिडिल ईस्ट क्राइसिस के बीच भारत ने संकट से निपटने के लिए शानदार कूटनीति अपनाई है जिसकी तारीफ होनी चाहिए। आनंद शर्मा ने लंबा एक्स पोस्ट साझा कर कई पहलुओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है जो राहुल गांधी की परेशानी बढ़ा सकता है।
शशि थरूर भी ले चुके हैं पार्टी लाइन से अलग स्टैंड!
इससे पूर्व केरलम से आने वाले सांसद शशि थरूर भी कांग्रेस लाइन से अलग स्टैंड ले चुके हैं। उन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई बार सरकार की नीतियों की तारीफ करते देखा गया है। जब पूरी कांग्रेस पहलगाम आतंकी हमले के बाद सरकार को कटघरे में खड़ा कर रही थी, तब शशि थरूर ने सरकार का बचाव किया था।
सांसद मनीष तिवारी भी इस कड़ी में अग्रिम पंक्ति में खड़े नजर आए थे। इन दो नेताओं से इतर अब कमलनाथ और आनंद शर्मा का पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाना राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस में अंदरखाने असंतोष बढ़ रहा है? क्या शीर्ष नेतृत्व इस मसले पर नाकामयाब है? ऐसे तमाम सवाल हैं जिनका जवाब जानने के लिए लोग बेताब हैं।
