Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले ही सियासत पूरी तरह से गरमा गई है। यह मामला देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लेकर है। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान हुए घटनाक्रम पर राजनीति खासी गरमाई हुई है। इस मामले पर पीएम मोदी समेत कई बीजेपी के नेताओं ने इस मामले पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। साथ ही पश्चिम बंगाल की ममता सरकार को इस मामले में जमकर घेरा है। बताते चले कि बसपा प्रमुख मायावती ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रया दी है और ममता बनर्जी और उनकी सरकार को जमकर घेरा है। चलिए आपको बताते है कि पूरा मामला क्या है?
क्या है पूरा मामला
यह विवाद द्रौपदी मुर्मू से जुड़ा हुआ है। जानकारी के मुताबिक बीते दिन राष्ट्रपति पश्चिम बंगाल में एक आदिवासी समाज के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंची थीं। इस दौरान प्रोटोकॉल के तहत उनके स्वागत के लिए न ही मुख्यमंत्री मौजूद रहीं और न ही कोई मंत्री आया। साथ ही कार्यक्रम की जगह में भी बदलाव किया गया था।
इसको लेकर खुद राष्ट्रपति ने नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि “मैं बंगाल की बेटी हूं, फिर भी मुझे यहां आने की अनुमति नहीं है। ममता मेरी छोटी बहन जैसी हैं, पता नहीं शायद वह मुझसे नाराज हैं।”
केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल सरकार से मांगा जवाब
वहीं अब इस मामले पर केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अगवानी के लिए तय प्रोटोकॉल में हुई चूक, दार्जिलिंग जिले में इंटरनेशनल संथाल कॉन्फ्रेंस की जगह बदलने और दूसरे संबंधित इंतज़ामों के बारे में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से आज शाम 5 बजे तक एक डिटेल्ड रिपोर्ट मांगी है।
बसपा प्रमुख मायावती ने दी प्रतिक्रिया
बसपा प्रमुख मायावाती ने अपने सोशल मीडिल प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा कि भारतीय संविधान के आदर्श व मान-मर्यादा के मुताबिक़ सभी को मा. राष्ट्रपति पद का सम्मान करना एवं इनके प्रोटोकाल का भी ध्यान रखना ज़रूरी तथा इस पद का किसी भी रूप में राजनीतिकरण करना ठीक नहीं है।
भारतीय संविधान के आदर्श व मान-मर्यादा के मुताबिक़ सभी को मा. राष्ट्रपति पद का सम्मान करना एवं इनके प्रोटोकाल का भी ध्यान रखना ज़रूरी तथा इस पद का किसी भी रूप में राजनीतिकरण करना ठीक नहीं है।
वर्तमान में देश की राष्ट्रपति एक महिला होने के साथ-साथ वे आदिवासी समाज से भी हैं। लेकिन…— Mayawati (@Mayawati) March 8, 2026
वर्तमान में देश की राष्ट्रपति एक महिला होने के साथ-साथ वे आदिवासी समाज से भी हैं। लेकिन अभी हाल ही में पश्चिम बंगाल में उनके दौरे के लेकर जो कुछ भी हुआ वह नहीं होना चाहिये था। यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण। इसी प्रकार, पिछले कुछ समय से संसद में भी ख़ासकर लोकसभा अध्यक्ष के पद का भी जो राजनीतिकरण कर दिया गया है, यह भी उचित नहीं है।
सभी को संवैधानिक पदों का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आदर-सम्मान व उनकी गरिमा का भी ध्यान रखना चाहिये तो यह बेहतर होगा। इसी क्रम में संसद का कल से शुरू हो रहा सत्र देश व जनहित में पूरी तरह से सही से चले, यही लोगों की अपेक्षा व समय की भी माँग।






