Shashi Tharoor: एंटी पेपर बिल को लेकर कल देर रात तक बहस देखने को मिली विपक्षी पार्टी के कई नेताओं ने चर्चा में हिस्सा लिया। वहीं अब एक नाम की काफी तेजी से चर्चा हो रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Shashi Tharoor ने भी इस बहस में हिस्सा लिया और इस विषय पर अपनी राय रखी।
हालांकि कई बार थरूर कई मुद्दों पर बीजेपी का समर्थन करते हुए देखा गया है, लेकिन अब उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। “मैं इतनी देर से इस बिल पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ क्योंकि हमारी सार्वजनिक परीक्षाओं की शुचिता का मामला असल में परीक्षाओं से कहीं ज़्यादा बड़ी बात है।”
एंटी पेपर बिल पर क्या बोले Shashi Tharoor?
एंटी पेपर बिल को लेकर कांग्रेस नेता Shashi Tharoor ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “अगर सरकार सच में यह कहती है कि इस बिल से मामले तीन महीने के अंदर सुलझा लिए जाएंगे, तो क्या वह सदन को बता सकती है कि यह कैसे होगा? क्या और जज होंगे, खास तौर पर नियुक्त सरकारी वकील होंगे, बेहतर फोरेंसिक क्षमता होगी, या यह सिर्फ़ कागज़ पर बना कानून है? इसी तरह, इस प्रस्तावित स्पेशल टास्क फ़ोर्स में कौन-कौन शामिल होगा?
Delhi: Speaking in the Lok Sabha, Congress MP Shashi Tharoor says, “If the government really says this Bill is going to get cases disposed of within three months, can it tell the House how this will be achieved? Will there be more judges, dedicated prosecutors, better forensic… pic.twitter.com/IspV7VlfwB
— IANS (@ians_india) July 28, 2026
इसके अधिकारियों की क्या योग्यताएं होनी चाहिए? उनका कार्यकाल कितना होगा? किन हालात में कोई मामला उन्हें सौंपा जाएगा? ये सवाल इसलिए अहम हैं क्योंकि गलत काम करने वाले और जांच करने वाले, दोनों ही सरकार के प्रशासनिक ढांचे के तहत ही काम कर रहे हैं।”
फास्ट ट्रैक कोर्ट पर क्या बोले कांग्रेस नेता
बता दें कि फास्ट ट्रैक कोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता Shashi Tharoor ने कहा कि “इस बिल में सही सज़ा और फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान है। सज़ा तो ठीक है, लेकिन सज़ा तक पहुँचने से पहले, पेपर लीक को रोकने के लिए प्रावधान लाने चाहिए। मैंने अपने भाषण और लेख में कुछ सुझाव दिए हैं। साथ ही, हमारी सरकार फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट की बात कर रही है। लेकिन फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट का हमारा अनुभव क्या है? अगर हम आँकड़ों पर नज़र डालें, तो 2025 में अदालतों के सामने 1.5 लाख नए मामले आए और उन्होंने उनमें से केवल 60,000 का निपटारा किया।
#WATCH | Delhi: On provisions of Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026, Congress MP Shashi Tharoor says, “The Bill provides for just punishment and fast track courts. Punishment is fine. But before reaching the punishment, bring in provisions to… pic.twitter.com/1Wyirz1Br8
— ANI (@ANI) July 29, 2026
इसलिए, फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में 2.5 लाख मामले लंबित हैं। यह संख्या बढ़ती ही जा रही है। सिर्फ़ नियम बनाने से न्याय नहीं मिलता। आपको नए जज, अतिरिक्त जज नियुक्त करने होंगे और शायद नए कोर्ट और नए सरकारी वकील भी बनाने होंगे। अगर न्यायिक प्रणाली में क्षमता ही नहीं है, तो नए कोर्ट की घोषणा करने का क्या फ़ायदा?
