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Bhupen Borah के इस्तीफे को लेकर सस्पेंस बरकरार! CM हिमंत बिस्व सरमा को मिला पूर्व अध्यक्ष का निमंत्रण, क्या बदलेगा राजनीतिक खेल?

Bhupen Borah

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Bhupen Borah: पूर्वोत्तर का केन्द्र बन चुके असम में हो रही लगातार बयानबाजी बड़े सियासी बदलाव का संकेत दे रही है। ऐसा लग रहा है कि चुनावी संग्राम छिड़ गया है। पहले गौरव गोगोई और सीएम हिमंत बिस्व सरमा के बीच आरोप-प्रत्यारोप और अब भूपेन बोरा के इस्तीफे ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। भूपेन बोरा ने इस्तीफा क्या दिया कि गुवाहाटी से नई दिल्ली तक सियासी गर्माहट आ गई।

सीएम हिमंत भी इस प्रकरण में पूरी दिलचस्पी ले रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि भूपेन बोरा ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया है। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी से पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे पर सस्पेंस बरकरार है। सवाल है कि क्या असम का राजनीतिक खेल बदलेगा? आइए इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने के साथ असम के हालिया सियासी समीकरण की चर्चा करते हैं।

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष Bhupen Borah के इस्तीफ को लेकर सस्पेंस बरकरार!

असम के सियासी गलियारों से निकल कर भूपेन बोरा का नाम दिल्ली में भी चर्चा का केन्द्र बना है। दरअसल, भूपेन बोरा ने बीते कल गौरव गोगोई के नाम पत्र लिख कर अपना इस्तीफा भेज दिया है। हालांकि, अभी कांग्रेस आलाकमान ने भूपेन बोरा का इस्तीफा मंजूर नहीं किया है। यही वजह है कि भूपेन बोरा के इस्तीफे को लेकर सस्पेंस बरकरार है। भूपेन बोरा ने खुद भी एनडीटीवी को दिए एक साक्षात्कार में कहा है कि उनका इस्तीफा स्पष्ट है।

भले ही हाईकमान इसे स्वीकार करे या ना करें वे अपना मत साफ कर चुके हैं। सीएम हिमंत बिस्व सरमा ने भी कहा है कि “श्री भूपेन बोरा असम कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ता के रूप में उभरे अंतिम प्रमुख हिंदू नेता रहे हैं। उनके निमंत्रण पर आज शाम उनसे भेंट करूंगा। मेरी हार्दिक इच्छा है कि वे भाजपा परिवार में शामिल होकर राष्ट्र और असम की सेवा के हमारे संकल्प को और सशक्त करें।” इससे साफ होता है कि भूपेन बोरा आगे भाजपा का दामन थामते नजर आ सकते हैं।

क्या बदलेगा असम का राजनीतिक खेल?

सूबे का सियासी खेल लगातार बदलता नजर आ रहा है। असम चुनाव से पहले दल-बदल का दौर भी जा रही है। तमाम नेता एक दल को छोड़ दूसरे का दामन थाम रहे हैं। इसी बीच पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है। संभावना है कि वे बीजेपी की सदस्यता लें। यदि ऐसा होता है कि असम का सियासी खेल बदल जाएगा।

सूबे में पार्टी की कमान पूरी तरह गौरव गोगोई और रकीबुल हुसैन के हाथों आ सकती हैं। ऐसे में कांग्रेस पार्टी पर आरोपों की फेहरिस्त और बढ़ जाएगी। हिमंत बिस्व सरमा अपने पुराने साथी भूपेन बोरा को लेकर दुगनी रफ्तार के साथ कांग्रेस पर हमला बोल सकते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि सूबे में आगे क्या कुछ होता है।

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