Commonwealth Games 2026: इंटरनेशनल लेवल की सबसे बड़ी इवेंट कही जाने वाली कॉमनेवल्थ गेम्स का आयोजन ग्लासगो में हो रहा है। 4 साल में एक बार आयोजित होने वाली इस इवेंट में भारत ने दो गोल्ड जीत लिए हैं। भारतीय जूडो खिलाड़ियों ने भारत को एक बार फिर से गौरवान्वित किया है।अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने इतिहास रचते भारत को दो गोल्ड मेडल दिलाए हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में 92 साल साल बाद भारत को ये उपलब्धि मिली है। जूडो खेल में भारत को पहली बार गोल्ड मिला है।
Commonwealth Games 2026 में भारत ने जीते गोल्ड
अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने महज 15 मिनट के भीतर अपने-अपने फाइनल्स जीतकर भारत की झोली में दो ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीताए। अस्मिता ने कनाडा की हेइडी क्वाच को हराकार गोल्ड जीता है। वहीं, हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के बेहद अनुभवी और पूर्व ब्रॉन्ज मेडलिस्ट जोशुआ काट्ज़ को हराकर भारत को गोल्ड दिलाया है।
जूडो में भारत को गोस्ड मेडल दिलाने वाली अस्मिता डे कौन हैं?
भारत को जूडो में गोल्ड मेडल दिलाने वाली अस्मिता डे त्रिपुरा के बेलोनिया की रहने वाली हैं । उनके पिता साइकिल मकैनिक हैं। वह वह सरकार के ‘खेलो इंडिया’ एथलीट कार्यक्रम के जरिए आगे बढ़ी हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले भी अस्मिता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को जीत दिलाई है। जूनियर एशिया जूडो कप 2023 में उन्होंने भारत को गोल्ड दिलाया था। वहीं, एशियन ओपन 2023 में भारत को कांस्य दिलाया था। अस्मिता ने 23 साल की उम्र में ये बड़ा इतिहास रच दिया है।
हर्ष सिंह कौन हैं?
वहीं, हर्ष सिंह की उम्र भी 23 साल हैं। उन्होंने 60 किलोग्राम भार वर्ग में भारत को गोल्ड जीताया है। हर्ष ने अपनी इस जीत को मां को समर्पित किया है। हर्ष भी खेलो इंडिया का हिस्सा रहे हैं। कॉमनवेल्थ में जाने से पहले वो ज़ाग्रेब ग्रैंड प्रिक्स और कजाकिस्तान बैरीसी ग्रैंड स्लैम का हिस्सा रह चुके हैं। हर्ष के पिता दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। हर्ष सिंह उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। लेकिन काफी समय से वो दिल्ली के करोलबाग में हैं। बहुत कम उम्र से पहले वो जूडो सीख रहे हैं।







