Artificial Intelligence: स्कूल से लेकर वर्कप्लेस तक पर कैसे एआई टूल्स छीन रहे हैं, आपकी प्राइवेसी, क्या सुरक्षा के नाम पर हो रहा अनुचित इस्तेमाल?

Artificial Intelligence: आजकल आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का दखल इतना बढ़ गया है कि अब जेन जी की प्राइवेसी भी खतरे में पड़ गई है। इससे जेन जी के साथ अन्य वर्ग के लोगों को भी काफी नुकसान हो रहा है।

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Artificial Intelligence, Photo Credit: Google

Artificial Intelligence: आपने खूब सुना या पढ़ा होगा कि एआई यानी आर्टिफिशियल इटेंलीजेंस ने आज यह काम कर दिया। बीते दिन इस बड़े काम को चुटकी में पूरा कर दिया। मगर क्या आप जानते हैं कि जैसे-जैसे एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वैसे-वैसे यह लोगों की लाइफ में प्राइवेसी को खत्म कर रहा है। एआई का इस्तेमाल जितना फायदेमंद साबितमंद साबित हो रहा है, उतना ही अब यह सुरक्षा के लिए खतरा बनता जा रहा है। आज की युवा पीढ़ी यानी जेन जी के लिए यह एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। ऐसे में इसके सवाल का जवाब तलाशना बेहद जरूरी हो गया है।

Artificial Intelligence कैसे हर पल रखता है आप पर नजर

बता दें कि किसी भी एडवांस तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के जरिए स्कूलों और कार्यस्थलों पर मॉनिटरिंग की जाती है, तो इसका असर सीधे या अप्रत्यक्ष तौर पर वहां मौजूद लोगों पर जरूर पड़ती है। आज के टाइम पर एआई टूल्स के जरिए स्कूलों में परीक्षा के दौरान वेबकैम, आई ट्रैकर, स्क्रीन रिकॉर्डिंग और सर्च हिस्ट्री पर भी नजर रखी जाती है। वहीं, ऑफिसों में एआई टूल्स के जरिए माउस एक्टिवेशन, मीटिंग में चेहरे की पहचान और काम के दौरान नॉर्मल मॉनिटरिंग भी की जाती है।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस टूल्स कैसे बिगाड़ते हैं जेन जी की लाइफ

जेन जी जेनरेशन लगभग हर टाइम एआई टूल्स से घिरी रहती है, जिसकी वजह से कई तरह की परेशानियां उन्हें घेर लेती है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का प्रेशर जेन जी को लगातार स्क्रीन पर एक्टिव रहने के लिए मजबूर करता है। इससे लोगों में भरोसे की कमी पैदा होती है। साथ ही सवाल पैदा होता है कि क्या हमे यकीन करने के काबिल नहीं समझा रहा है? इसके अलावा, ऑफिस में एआई टूल्स के जरिए होने वाली मॉनिटरिंग का असर कर्मचारी की क्रिएटिविटी पर पड़ता है। साथ ही वर्क लाइफ संतुलन पूरी तरह से बिगड़ जाता है।

प्राइवेसी के साथ खड़े होते हैं कई सवाल

उधर, एआई टूल्स के जरिए बढञती हुई मॉनिटरिंग कई तरह के सवाल भी पैदा करती है। एआई टूल्स के पीछे आखिर कौन डेटा को देख रहा है? क्या डेटा का गलत इस्तेमाल हो रहा है? ऐसी स्थिति में जेन जी के पास इससे बाहर निकलने का कोई उचित ऑप्शन नहीं होता है। ऐसे में न चाहते हुए भी जेन जी को अपनी प्राइवेसी को दांव पर लगाना पड़ता है।

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