Artificial Intelligence: अमेरिका और इजरायल ने मिलकर करीब 10 दिन पहले 28 फरवरी को ईरान पर हमला किया था। इसके बाद अब लड़ाई में कई अन्य देश भी कूद गए हैं। ‘India Today’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हवाई हमले किए, तो मिसाइलें वहां गिरीं, जहां उन्हें कभी नहीं गिरना चाहिए था, दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में शाजारेह तैयबेह गर्ल्स एलिमेंट्री स्कूल पर मिसाइलें गिरी। इसमें 7 से 12 साल की 165 से अधिक स्कूली लड़कियों के साथ-साथ स्कूल के टीचर और स्टाफ भी मारे गए। यह घटना, ईरान युद्ध में आम लोगों की सबसे बड़ी मौतों में से एक है। ऐसे में अमेरिका पर इल्जाम लगाए जा रहे हैं कि उसने एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल करके गलत जगह पर निशाना साधा।
ईरान पर हुए हमले में यूएस ने ली थी Artificial Intelligence की मदद?
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘हमें लगता है कि यह ईरान ने किया, क्योंकि वे अपने हथियारों के बारे में बहुत गलत जानकारी देते हैं। अमेरिका का आम लोगों को टारगेट करने का कोई इरादा नहीं था।’
कई अन्य रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान में यूएस के हमलों के दौरान एआई टूल्स का इस्तेमाल किया गया। अमेरिकी मिलिट्री ने अपने टारगेट की पहचान करने के लिए एंथ्रोपिक के क्लाउड जेनरेटिव एआई की मदद ली। वहीं, अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ, जो लड़ाई में एआई इंटीग्रेशन के समर्थक रहे हैं, उन्होंने भी टारगेट की सटीकता के लिए सेना के कमिटमेंट पर जोर दिया। मगर अभी तक इस संबंध में उनके ऑफिस ने मिनाब हत्याओं के बारे में कोई डिटेल नहीं दी है।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस किसी जंग में कैसे दे सकता है अपना योगदान
बता दें कि एंथ्रोपिक का क्लाउड एआई एक पावरफ़ुल लैंग्वेज मॉडल है, जिसे एंथ्रोपिक ने 2023 में पेश किया था। यह मुश्किल जानकारी को पढ़कर एनालाइज कर सकता है, रिपोर्ट को समराइज कर सकता है, और बड़े डेटासेट को ऑर्गनाइज करने में मदद कर सकता है। वहीं, मिलिट्री सेटिंग में यह इंटेलिजेंस डेटा में पैटर्न और जरूरी डिटेल्स को हाईलाइट कर सकता है। इससे पॉसिबल टारगेट तेजी से ढूंढने और ऑपरेशन को बेहतर तरीके से प्लान करने में मदद मिलती है। हालांकि, अंतिम फैसला किसी मिलिट्री अधिकारी का ही होता है।
