ChatGPT: रूस और चीन के साइबर खतरे से बचाना था, मगर एजेंसी प्रमुख ने खुद ही अपलोड कर दिए संवेदनशील डॉक्यूमेंट, क्या अब एआई नीतियों पर पड़ेगा असर?

ChatGPT: अमेरिका की साइबरसिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी के प्रमुख ने खुद चैटजीपीटी पर संवेदनशील दस्तावेजों को अपलोड कर दिया। इसके बाद साइबर गलियारे में हड़कंप मच गया।

ChatGPT: एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का जिस तरह से इस्तेमाल बढ़ रहा है, उससे कई लोगों के मन में इसे लेकर खतरनाक विचार चल रहे हैं। लोगों को मदद के साथ यह उनकी जगह लेने की क्षमता भी रखता है, इसलिए टेक मार्केट में हलचल तेज है। यह तो आप जानते ही होंगे कि एआई के साथ साझा की गई जानकारी का गलत यूज हो सकता है। साथ ही डेटा का इस्तेमाल कंपनी अपने एआई टूल को ट्रेनिंग देने के लिए कर सकती है। इसी बीच अमेरिका से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ‘India Today’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में जिस शख्स पर साइबर सेफ्टी की जिम्मेदारी थी, उसी ने चैटजीपीटी पर संवेदनशील दस्तावेजों को शेयर कर दिया।

ChatGPT पर अपलोड किए सेंसेटिव दस्तावेज

अमेरिका की सीआईएसए यानी साइबरसिक्योरिटी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सिक्योरिटी एजेंसी के कार्यवाहक डायरेक्टर मधु गोट्टुमुक्कला ने एआई प्लेटफॉर्म चैटजीपीटी के साथ कॉन्ट्रैक्टिंग और साइबरसिक्योरिटी से जुड़ी चीजे शेयर की। इसके बाद अमेरिकी साइबर गलियारे में हड़कंप मच गया। सीआईएसए के प्रमुख पर रूस और चीन से अमेरिका को साइबर खतरे से सुरक्षित रखना था, मगर उन्होंने पिछले साल गर्मियों में ऑफिशियल दस्तावेजों को पब्लिक वर्जन वाले चैटजीपीटी पर अपलोड कर दिया। इस घटना के बाद ऑटोमेटेड सिक्योरिटी अलर्ट और एक इंटरनल रिव्यू शुरू हो गया।

जानें कौन हैं चैटजीपीटी पर सरकारी दस्तावेज डालने वाले मधु गोट्टुमुक्कला

सीआईएसए के प्रमुख मधु गोट्टुमुक्कला भारतीय मूल के हैं और वे फेडरल नेटवर्क को रूस और चीन से जुड़े साइबर खतरों से बचाने के लिए जिम्मेदार हैं। जानकारी के मुताबिक, डॉ. गोट्टुमुक्कला के पास डकोटा स्टेट यूनिवर्सिटी से इन्फॉर्मेशन सिस्टम्स में पीएचडी यूनिवर्सिटी ऑफ डलास से इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट में एमबीए, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एट आर्लिंगटन से कंप्यूटर साइंस में एमएस और आंध्र यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीई की डिग्री है।

क्या अब एआई नीतियों पर पड़ेगा असर?

अमेरिका में घटी इस घटना के बाद साइबर एजेंसी अपनी सरकारी नीतियों काफी हद बदलाव कर सकती है। एआई का गलत इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, जोकि वैश्विक स्तर पर किसी भी देश की मिलिट्री और साइबर सुरक्षा सिस्टम के लिए अस्थिता पैदा कर सकती है। संवेदनशील क्षेत्रों में अभी अधिकतर देशों के पास एआई के रेगुलेशन को लेकर कठोर नियम नहीं हैं।

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