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क्या 20 लाख डिग्री तक का तापमान झेल पाएगा Aditya L1 ? जानिए क्या है भारत के पहले सोलर मिशन से जुड़ा ISRO का नया अपडेट

Aditya-L1: आदित्य एल1 मिशन अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। 5 सितंबर को दूसरी बार यह कक्षा परिवर्तित करेगा। इसके बाद एल-1 पॉइंट पर पहुंचकर सूर्य पर नजर रखेगा।

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By: Brijesh Chauhan

Published: सितम्बर 4, 2023 10:36 पूर्वाह्न

Aditya L1 Mission
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Aditya L1: भारत ने अपने पहले सोलर मिशन आदित्य एल1 (Aditya-L1 ISRO Mission) को लॉन्च करके सूर्य की ओर पहला कदम बढ़ा दिया है। सफल लॉन्चिंग के बाद से मिशन में लगातार प्रगति दर्ज की जा रही है। फिहलाल, इसे सूर्य के पांच लैग्रेंज बिंदुओं में से L1 तक भेजा जा रहा है। जहां, रहकर यह सूर्य का अध्ययन करेगा। L1 पॉइंट को इसलिए चुना गया है क्योंकि वहां से आदित्य-एल1 सूर्य के निर्बाध दृश्य को देख पाएगा। इसे पॉइंट से पृथ्वी की दूरी लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर है। जिस वजह से अपना सफर तय करने में करीब 4 महीने का समय लगेगा।

लगातार प्रगति कर रह मिशन

ISRO के मुताबिक, मिशन लगातार प्रगति पर है। इसमें अभी तक कोई भी तकनीकी दिक्कत नहीं आई है। ISRO ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) मिशन से जुड़ा नया अपडेट दिया है। ISRO ने ट्वीट कर कहा, “उपग्रह पूरी तरह स्वस्थ है और नाममात्र का कार्य कर रहा है। पहला अर्थ-बाउंड पैंतरेबाजी (ईबीएन#1) इस्ट्रैक, बेंगलुरु से सफलतापूर्वक निष्पादित किया गया। प्राप्त की गई नई कक्षा 245 किमी x 22459 किमी है। अगला युद्धाभ्यास (BEN#2) 5 सितंबर, 2023 को लगभग 03:00 बजे के लिए निर्धारित है।”

क्या सूर्य लैंड करेगा आदित्य-एल 1 ?

भारत के पहले सोलर मिशन को लेकर ज्यादातर लोगों में मन में एक सवाल जरूर गूंज रहा है, क्या आदित्य-एल 1 भी सूर्य पर लैंड करेगा ? और अगर नहीं करेगा तो इसे सूर्य मिशन क्यों कहा जा रहा है ? दरअसल, जैसा आप सोच रहे हैं, वैसा है नहीं। यह मिशन सूर्य के अध्ययन करेने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया है। क्योंकि सूर्य पर तापमान 5 से 6 हजारा डिग्री सेल्सियस के बीच होता है, ऐसे में सूर्य पर उतरना तो फिलहाल संभव नहीं है। लेकिन, सूर्य के नजदीक जाकर उसकी स्टडी की जा सकती है।

सूर्य के तापमान से कितना खतरा ?

यहां एक सवाल और भी है, क्या आदित्य एल1 सूर्य का तापमान झेल पाएगा ? वैसे तो सूर्य की बाहरी परत यानी कोरोना का तापमान करीब लगभग 18 से 20 लाख डिग्री सेल्सियस के बीच में होता है। लेकिन, जैसे की हमने आपको बताया कि यह मिशन L1 पॉइंट तक जाएगा, जहां सूर्य का तपमान इससे बेहद कम है। इस तपमान से बचने के लिए आदित्य एल1 को खास तरीके से डिजाइन किया गया है। इसके उपकरणों में कार्बन का इस्तेमाल किया गया है, जो सूर्य का तपमान झेल पाएंगे।

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Brijesh Chauhan

बृजेश बीते 4 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। इन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में M.A की पढ़ाई की है। यह कई बड़े संस्थान में बतौर कांटेक्ट एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं। फिलहाल बृजेश DNP India में बतौर कांटेक्ट एडिटर पॉलिटिकल और स्पोर्ट्स डेस्क पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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