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High Speed Rail Corridor: दिल्ली वाराणसी समेत इन 7 रूटों पर 250 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ेगी ट्रेन, रेलवे के ऐलान से हलचल तेज; चेक करें रूट

High Speed Rail Corridor: दिल्ली वाराणसी समेत 7 रूटों पर हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने को लेकर मंजूरी दे दी है।

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By: Anurag Tripathi

Published: फ़रवरी 12, 2026 3:15 अपराह्न

High Speed Rail Corridor
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High Speed Rail Corridor: बजट 2026-27 के दौरान निर्मला सीतारमण ने रेल प्रेमियों को बड़ा तोहफा देते हुए दिल्ली वाराणसी समेत 7 रूटों पर हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने को लेकर मंजूरी दे दी है। सबसे खास बात है कि इन रूटों पर 250 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेन फर्राटा भरेंगी। यानि दिल्ली से वाराणसी की दूरी केवल 3 से 3.5 घंटे की हो जाएगी, जबकि अभी हाई स्पीड ट्रेन से 8 से 9 घंटों में दिल्ली से वाराणसी का सफर पूरा होता है। उच्च गति रेल, पारंपरिक और अर्ध-उच्च गति रेल सेवाओं से मौलिक रूप से भिन्न है। जहां पारंपरिक रेल मालगाड़ियों और धीमी गति वाली यात्री ट्रेनों के साथ पटरियों को साझा करती है, वहीं उच्च गति रेल विशेष गलियारों पर चलती है, जिससे उच्च गति और अधिक पूर्वानुमानित समय-सारणी संभव हो पाती है। चलिए आपको बताते है इससे जुड़ी सभी अहम जानकारी।

इन सात रूट पर बनेगा High Speed Rail Corridor

बजट में वित्त मंत्री ने 7 नए हाई स्पीड रेल कॉरिडोर को मंजूरी दी है। जो कई मायनों में गेमचेंजर साबित होने जा रहा है। अगर रूट की बात करें तो इसमे मुंबई से पुणे, पुणे से हैदराबाद, हैदराबाद से बेंगलुरु, हैदराबाद से चैन्नई, चैन्नई से बेंगलुरु, दिल्ली से वाराणसी, वाराणसी से सिलीगुड़ी शामिल है। हाई-स्पीड रेल (एचएसआर) से तात्पर्य उन यात्री रेल प्रणालियों से है जिन्हें पारंपरिक रेल प्रणालियों की तुलना में काफी अधिक गति से चलने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

ये प्रणालियाँ आमतौर पर विशेष कॉरिडोर पर चलती हैं और उन्नत रोलिंग स्टॉक, सिग्नलिंग, संचार और सुरक्षा तकनीकों द्वारा समर्थित होती हैं, जिससे उच्च स्तर की परिचालन दक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है। परिचालन उद्देश्यों के लिए, हाई-स्पीड रेल को उन रेल प्रणालियों के रूप में परिभाषित किया जाता है जो ट्रेनों को 250 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से चलाती हैं।

कॉरिडोर की प्रमुख विशेषताएं

  • यह कॉरिडोर महाराष्ट्र के मुंबई और गुजरात के अहमदाबाद को जोड़ता है, जो दो प्रमुख आर्थिक और शहरी केंद्र हैं।
    इसकी कुल लंबाई लगभग 508 किलोमीटर है।
  • इस परियोजना को रेल मंत्रालय के अधीन भारत सरकार की कंपनी नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • इस कॉरिडोर को 320 किमी प्रति घंटे की उच्च गति के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो उन्नत रोलिंग स्टॉक, सिग्नलिंग और ट्रेन नियंत्रण प्रणालियों द्वारा समर्थित है।

यह कॉरिडोर भूभाग और शहरी घनत्व के आधार पर एलिवेटेड, अंडरग्राउंड और एट-ग्रेड सेक्शन का मिश्रण है।
इस मार्ग पर कुल 12 स्टेशन बनाए जाने की योजना है। स्टेशनों को मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिससे मौजूदा रेलवे लाइनों, मेट्रो सिस्टम और सड़क परिवहन के साथ इनका एकीकरण संभव हो सके। यानि आने वाले दिनों में भारत जापान, चीन जैसे देशों को टक्कर देगा।

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Anurag Tripathi

अनुराग त्रिपाठी को पत्रकारिता का 2 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। वह बिजनेस, यूटिलिटी, पॉलिटिक्स विषयों पर लिखने में रूचि रखते है। वर्तमान में वह डीएनपी इंडिया के साथ कार्यरत है।
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