BRICS Summit 2026 में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की हुई मुलाकात, क्या भारत और चीन के रिश्तों में दिखेगी गर्मजोशी, जानें सबकुछ

BRICS Summit 2026: भारत की मेजबानी में हो रहे ब्रिक्स के दौरान पीएम मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अहम द्विपक्षीय मुलाकात हुई।

BRICS Summit 2026

फाइल फोटो

BRICS Summit 2026: भारत की मेजबानी में हो रहे BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अहम द्विपक्षीय मुलाकात हुई। दोनों नेताओं की यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद के कारण भारत और चीन के रिश्तों में तनाव रहा है। ऐसे में इस मुलाकात को दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बता दें कि शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत आए हैं। दोनों नेताओं की बैठक 12 सितंबर को नई दिल्ली में समिट के दौरान हुई।

PM Modi ने किन बातों पर दिया जोर?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और साझा हितों को महत्वपूर्ण बताया। भारत की ओर से यह भी साफ किया गया कि दोनों देशों के बीच सीमा पर शांति और स्थिरता व्यापक द्विपक्षीय रिश्तों के लिए जरूरी है। पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। इसके लिए बातचीत और संवाद जारी रखना जरूरी है। भारत और चीन के रिश्तों में सबसे बड़ा मुद्दा सीमा विवाद रहा है। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्तों में काफी तनाव आया था। हालांकि बदलते वैश्विक परिवेश लगातार बदल रहा है।

शी जिनपिंग ने इन मुद्दों को उठाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक के दौरान, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि, “जटिल अंतरराष्ट्रीय हालात और उनसे जुड़े बदलावों व चुनौतियों के बीच, दुनिया के दो सबसे ज़्यादा आबादी वाले देशों और ‘ग्लोबल साउथ’ के अहम सदस्यों के तौर पर चीन और भारत की ज़िम्मेदारियां बहुत बड़ी हैं। दोनों पक्षों को मानवता के भविष्य और अपने लोगों की भलाई को ध्यान में रखते हुए,

बड़े ब्रिक्स (BRICS) ढांचे के तहत उच्च-गुणवत्ता वाले सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। हमें एक समान और व्यवस्थित बहुध्रुवीय दुनिया तथा समावेशी व आपसी फ़ायदे वाले आर्थिक वैश्वीकरण की वकालत करनी चाहिए, ताकि विश्व शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने में और अधिक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके।”

 

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