Donald Trump: जनवरी 2026 शुरू होते ही दुनिया में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। एक तरफ अमेरिका ने वेनेजुएला पर एक तरह से कब्जा कर लिया है। तो वहीं तेल को लेकर रूस और अमेरिका आमने सामने है। दरअसल हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर जानकारी दी थी कि “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि वेनेजुएला में अंतरिम प्राधिकरण संयुक्त राज्य अमेरिका को 30 से 50 मिलियन बैरल उच्च गुणवत्ता वाला, प्रतिबंधित तेल सौंपेंगे”।
जिसके बाद रूस और अमेरिका आमने सामने आ गए है। इसी बीच अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि” यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रम्प को उन देशों को दंडित करने की अनुमति देगा जो पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन देने वाले सस्ते रूसी तेल खरीदते हैं”। यानि इस विधेयक से भारत और चीन की मुश्किलें बढ़ सकती है।
रूसी तेल खरीद पर अमेरिका की नई चाल से हलचल तेज
गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप लगातार भारत को रूस तेल खरीदने से मना कर रहे है। इसी बीच अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के एक ट्वीट ने सनसनी मचा दी है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि “आज राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ कई मुद्दों पर हुई एक बेहद सार्थक बैठक के बाद, उन्होंने द्विदलीय रूस प्रतिबंध विधेयक को मंजूरी दे दी, जिस पर मैं सीनेटर ब्लूमेंथल और कई अन्य लोगों के साथ महीनों से काम कर रहा था। यह सही समय पर उठाया गया कदम है, क्योंकि यूक्रेन शांति के लिए रियायतें दे रहा है और पुतिन सिर्फ बातें कर रहे हैं, निर्दोषों की हत्या करना जारी रखे हुए हैं।
यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रम्प को उन देशों को दंडित करने की अनुमति देगा जो पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन देने वाले सस्ते रूसी तेल की खरीद करते हैं। यह विधेयक राष्ट्रपति ट्रम्प को चीन, भारत और ब्राजील जैसे देशों के खिलाफ जबरदस्त दबाव बनाने की शक्ति देगा, ताकि उन्हें सस्ते रूसी तेल की खरीद बंद करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके, जो यूक्रेन के खिलाफ पुतिन के नरसंहार के लिए वित्तपोषण प्रदान करता है”।
Donald Trump की नई चाल से हलचल तेज
ऐसा लग रहा है मानो डोनाल्ड ट्रंप नियमों के विरूद्ध काम कर रहे है। जानकारी के मुताबिक ट्रंप ने रूस का ऑयल टैंकर जब्त कर लिया। जिसकी जवाबी कार्रवाई में रूस ने अपना सबमरिन भेज दिया है। इसके अलावा अब भारत में भी हलचल तेज हो गई है कि क्या भारत पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगने जा रहा है। गौरतलब है कि ट्रंप के इस फैसले से आर्थिक स्थिति खराब हो सकती है। वहीं अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में भारत का अगला कदम क्या होगा।






