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Iran US Tensions: नौसेना के साथ लड़ाकू विमानों की गरज से दहला मिडिल ईस्ट! ईरान में गहराया संकट, युद्ध छिड़ा तो…

Iran US Tensions: मिडिल ईस्ट में अमेरिकी नौसेना की तैनाती के साथ लड़ाकू विमानों की गरज लोगों की बेचैनी बढ़ा रही है। यदि अमेरिका और ईरानी सेना जंग-ए-मैदान में आमने-सामने हुए, तो तबाही का मंजर देखने को मिल सकता है।

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By: Gaurav Dixit

Published: फ़रवरी 25, 2026 10:40 पूर्वाह्न

Iran US Tensions
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Iran US Tensions: फारस की खाड़ी पर बसे देशों से लेकर मिडिल ईस्ट के अन्य तमाम हिस्सों में लोगों के चेहरे पर एक शिकन है। लोग ईरान पर मंडरा रहे युद्ध रूपी संकट का आभास साफ तौर पर कर रहे हैं। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन और जेराल्ड आर फोर्ड की तैनाती खामेनेई सेना की बेचैनी बढ़ा रही है।

इससे इतर तमाम अमेरिकी आधुनिक फाइटर जेट्स भी ईरान की घेराबंदी किए हैं। लड़ाकू विमानों की गरज लगातार मिडिल ईस्ट को दहला रही है। ये स्पष्ट है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ा, तो बर्बादी का वो मंजर देखा जाएगा जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की होगी। यहि वजह है प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई पर नजरें टिकीं हैं।

अमेरिकी नौसेना के साथ लड़ाकू विमानों की गरज से दहला मिडिल ईस्ट!

मध्य पूर्व में लड़ाकू विमानों की गरज साफ तौर पर सुनी जा सकती है। जॉर्डन से कतर तक अमेरिकी एयरबेस अलर्ट पर हैं। 500 से अधिक वायु सेना के लड़ाकू विमानों की तैनाती ईरान पर युद्ध का संकट मंडराने की आशंका व्यक्त कर रही है। वायु सेना लगातार युद्धाभ्यास कर अली खामेनेई के शासन को वार्ता के लिए चेता रही है।

नौसेना भी बढ़-चढ़कर मिडिल ईस्ट के लोगों की बेचैनी बढ़ा रही है। दर्जन भर से अधिक अमेरिकी नौसैनिक जहाज मिडिल ईस्ट का रुख कर चुके हैं। इन्हें ईरान के इर्द-गिर्द पहुंचाया जा रहा है। वायु सेना के साथ नौसेना की तैनाती भविष्य में युद्ध की ओर इशारा कर रही है। यही वजह है कि मिडिल ईस्ट दहल उठा है और ईरान के लोगों के चेहरे पर युद्ध का डर सता रहा है।

अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध छिड़ा तो मचेगा तांडव!

यदि अमेरिकी और ईरानी सेना जंग के मैदान में आमने-सामने हुईं, तो मिडिल ईस्ट में तांडव मचना तय है। अभी तक दोनों देशों की ओर से सिर्फ बयानबाजी का दौर जारी है। साथ ही सैन्य तैयारियां रफ्तार पकड़ रही हैं। ऐसे में यदि अमेरिका और ईरान युद्ध के मैदान में आमने-सामने आ गए, तो बर्बादी का वो मंजर देखा जाएगा जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की हो।

इतना ही नहीं, आर्थिक स्तर पर भी मिडिल ईस्ट को तगड़ा चोट पहुंचेगा। कच्चे तेल का निर्यात बुरी तरह प्रभावित होगा जो दुनिया में अस्थिरता का कारण बन सकता है। यही वजह है तेहरान से लेकर दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लोग चिंतित हैं। हालांकि, युद्ध का अंतिम फैसला डोनाल्ड ट्रंप के हाथों में है जिसके बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल एक-एक घटनाक्रम पर लोगों की नजरें टिकीं हैं।

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Gaurav Dixit

गौरव दीक्षित पत्रकारिता जगत के उभरते हुए चेहरा हैं। उन्होनें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। गौरव राजनीति, ऑटो और टेक संबंघी विषयों पर लिखने में रुची रखते हैं। गौरव पिछले दो वर्षों के दौरान कई प्रतिष्ठीत संस्थानों में कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में DNP के साथ कार्यरत हैं।
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