US-Israel-Iran War: मिडिल ईस्ट की तनावपूर्ण स्थिति ने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है। आलम ये है कि पड़ोसी मुल्क में हाहाकार की स्थिति है। ईंधन संकट तेजी से गहरा रहा है। ये कोई हवा-हवाई दावा नहीं, बल्कि प्रमाणित सत्य है। दरअसल, यूएस-इजरायल-ईरान वॉर के बीच पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कंगाली की मार झेल रही आवाम पर कई प्रतिबंध लगाए हैं।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने मध्य पूर्व में छिड़े युद्ध के बीच ऑफिशियल डिनर और इफ्तार पार्टियों पर रोक लगाने का ऐलान किया है। इसके साथ ही स्कूल, कॉलेज, सरकारी दफ्तर व अन्य प्रतिष्ठान तय समय अंतराल पर बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। ये सारे कदम ईंधन बचाने की दिशा में उठाया गया है जो पाकिस्तान में अंदरखाने मची हलचल का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
पाकिस्तान में US-Israel-Iran War के कारण गहराया ईंधन संकट!
ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले के कारण पाकिस्तान में कच्चे तेल का आयात प्रभावित हुआ है। पाकिस्तान भी ईरान, इराक, कुवैत, कतर, सऊदी अरब जैसे देशों से ही कच्चे तेल का आयात करता है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल की ओर से जारी ताबड़तोड़ हमले के कारण आयात पर असर पड़ा है। इससे ईंधन संकट और गहरा गया है।
पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। ब्लैक में ईंधन महंगे दाम पर बेचे जा रहे हैं। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में सरकार की ओर से इजाफा किया गया है। इससे ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ गई है और महंगाई आसमान छू रही है। परिणामस्वरूप मुल्क में हाहाकार का दौर मचा है और कंगाली की मार झेल रही आवाम सड़कों पर आ गई है।
कंगाली की मार झेल रही आवाम पर कई प्रतिबंध!
पीएम शहबाज शरीफ ने कंगाली की मार झेल रही आवाम के लिए कई प्रतिबंधों का ऐलान किया है। ईंधन संकट के बीच अगले 2 महीनों के लिए सरकारी गाड़ियों के फ्यूल अलाउंस में 50 फीसदी की कटौती होगी। फेडरल और प्रोविंशियल सरकारी जगहों पर सरकारी गाड़ियों के 60 फीसदी वाहन ग्राउंडेड रहेंगे। 50 फीसदी स्टाफ घर से काम करेंगे।
सरकार ने 16 से 31 मार्च तक स्कूलों को बंद रखने का ऐलान किया है। वहीं हायर क्लासेस ऑनलाइन चलेंगी। सरकार टेलीकॉन्फ़्रेंसिंग और ऑनलाइन मीटिंग को प्राथमिकता देगी। ये सारे कदम ईंधन बचाने की दिशा में उठाए गए हैं। हालांकि, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आवाम भी इन फैसलों से प्रभावित होगी और उनकी जीवनशैली पर असर पड़ेगा।
