US-Israel-Iran War: पश्चिम एशिया में मची हलचल दुनिया को बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कोई आर्थिक मोर्चे पर चोट खा रहा है, तो किसी की रणनीतिक चुक उसके लिए काल बनी है। इसी बीच दुनिया की नजरें पाकिस्तान पर हैं जो असमंजस की स्थिति में फंसा है। आलम ये है कि पाकिस्तानी सीडीएफ आसिम मुनीर के बाद हुजूर-ए-आलम शहबाज शरीफ भी सऊदी अरब की शरण में पहुंचे हैं।
तालिबानी हुकूमत की ओर से पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई के बीच शहबाज शरीफ ने जेद्दा में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की है। यूएस-इजरायल-ईरान वॉर के बीच पाकिस्तानी पीएम की ये मुलाकात कई सवालों को जन्म दे रही है। क्या पाकिस्तान अमेरिका-इजरायल-ईरान वॉर में शामिल हो सकता है? तालिबानी हमले के बीच क्या पाकिस्तान पर दबाव भारी पड़ेगा? ऐसे तमाम सवाल हैं जिनका जवाब ढूंढ़ने की कोशिश की जाएगी।
खाड़ी देशों में उठा-पटक के बीच सऊदी पहुंचे PM शहबाज!
ईरान से लेकर सऊदी अरब, यमन, दुबई, जॉर्डन, इराक, कुवैत समेत अन्य खाड़ी देशों में उठा-पटक का दौर जारी है। ये स्थिति ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद उपजी है। इसी बीच पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ सऊदी अरब पहुंच गए हैं। यहां उन्होंने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मुलाकात की है। इससे पूर्व आसिम मुनीर भी सऊदी अरब गए थे।
ऐसे में खाड़ी देशों में जारी उठा-पटक के बीच पीएम शहबाज का ये दौरा अहम माना जा रहा है। दावे के मुताबिक सऊदी अरब अब पाकिस्तान से खुलकर ईरानी हमलों को रोकने के लिए समर्थन मांग रहा है। दरअसल, ईरान ने खाड़ी के कई देशों में अमेरिकी एयरबेस का हवाला देते हुए ड्रोन अटैक किए। सऊदी में उनमें से एक है। यही वजह है कि पाकिस्तान-सऊदी के बीच हुआ डिफेंस पैक्ट पीएम शहबाज की मुश्किलें बढ़ा रहा है।
यदि पाकिस्तान खुलकर ईरानी हमलों की मुखालफत करता है, तो ईरान से उसके संबंध दाव पर लगेंगे। ऐसा ना होने की स्थिति में सऊदी पाकिस्तान से खफा हो सकता है। इन्हीं तर्कों के आधार पर पाकिस्तान के असमंजस में होने की बात कही जा रही है। ये दर्शाता है कि पाकिस्तान की विदेश नीति किस कदर दिशाहीन हो चली है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकीं हैं कि असमंजस में फंसे पाकिस्तान का अगला कदम क्या होगा।
क्या तालिबानी हमलों के बीच US-Israel-Iran War में होगी पाकिस्तान की एंट्री?
ये बड़ा सवाल है जिसका पुख्ता जवाब भविष्य के गर्भ में है। दरअसल, पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में बीते कल तालिबानी लड़ाकों ने हमला किया था। इससे पूर्व भी डूरंड रेखा को लेकर संघर्ष का दौर देखने को मिल चुका है। इसी बीच पाकिस्तान पर सऊदी अरब का दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। पहले आसिम मुनीर और फिर पीएम शहबाज शरीफ का सऊदी दौरा इसका पुख्ता प्रमाण भी है।
यही वजह है कि पाकिस्तान के यूएस-इजरायल-ईरान वॉर में शामिल होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। यदि सऊदी ने कदम बढ़ाए, तो डिफेंस पैक्ट के तहत पाकिस्तान को भी ईरान के खिलाफ मोर्चा संभालना होगा। दोनों देशों के बीच हुई संधि यही कहती है। इसी क्रम पीएम शहबाज के सऊदी दौरे को दबाव के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के बीच पाकिस्तान क्या कदम उठाता है।
