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Pakistan News: बलूचिस्तान से इस्लामाबाद तक बगावत! ट्रंप का पसंदीदा बने रहने के लिए क्या करेंगे मुनीर? फेल होते दांव के बीच जानें

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Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Pakistan News: पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान आंतरिक बगावत के दौर से जूझ रहा है। बलूचिस्तान में जहां एक ओर बलूच लिबरेशन आर्मी खुलकर मुनीर सेना को निशाने पर ले रही है। तो वहीं इस्लामाबाद से रावलपिंडी, मुजफ्फराबाद, कराची तक अप्रत्यक्ष विरोध का दौर जारी है। हाल ही में इस्लामाबाद की एक शिया मस्जिद में हुआ धमाका इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।

इन प्रतिकूल परिस्थितियों ने नए सीडीएफ आसिम मुनीर के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। अमेरिका का पसंदीदा बनने को बेताब आसिम मुनीर अब प्रेसिडेंट ट्रंप को खुश करने के लिए क्या तरकीब आजमाएंगे? ट्रंप के साथ आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ के फेल होते दांव के बीच आगे क्या हो सकता है? ऐसे तमाम सवाल हैं जिनका जवाब ढूंढ़ने की कोशिश की जाएगी।

बलूचिस्तान से इस्लामाबाद तक बगावत का दौर!

अशांत क्षेत्र बलूचिस्तान में लड़ाके खुलकर मुनीर सेना की नाक में दम कर रहे हैं। बलूचिस्तान के विभिन्न हिस्सों में गोलीबारी और बमबारी कर बीएलए ने अब तक हजारों सैन्यकर्मियों को मौत के घाट उतारा होगा। बलूचिस्तान से इतर राजधानी इस्लामाबाद, रावलपिंडी, कराची, लाहौर समेत अन्य तमाम इलाकों में भी स्थिति प्रतिकूल है।

हाल ही में इस्लाबाद की एक शिया मस्जिद में जोरदार धमाका देखने को मिला जो अप्रत्यक्ष तौर पर अंदरखाने सुलग रही विद्रोह की आग का पुख्ता प्रमाण है। कराची, लाहौर, रावलपिंडी, मुजफ्फराबाद व अन्य तमाम इलाकों में भी पाकिस्तानी हुकूमत और सेना के खिलाफ विद्रोह के सुर सुने जा चुके हैं। ये दर्शाता है कि कैसे पाकिस्तान अंदरखाने बगावत की मार झेल रहा है।

फेल होते दांव के बीच ट्रंप का पसंदीदा बने रहने के लिए क्या करेंगे मुनीर? 

आसिम मुनीर व्हाइट हाउस का पसंदीदा शख्स बने रहने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। दुनिया ने देखा कि कैसे मुनीर ने डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा प्रेसिडेंट बनने के बाद वाशिंगटन का दौरा किया। व्हाइट हाउस में मुनीर-ट्रंप की लंच ने सुर्खियां बटोरी। पाकिस्तान अमेरिका की शर्तों पर ‘ट्रंप बोर्ड पीस’ का हिस्सा बनने तक के लिए तैयार हो गया। ये सबकुछ दर्शाता है कि पड़ोसी मुल्क अमेरिका का खास बनने के लिए किस कदर परेशान है।

अमेरिका को भी पाकिस्तान में जमीन तले छिपे खनिजों में दिलचस्पी है। यही वजह है कि अमेरिका ने बलूचिस्तान में खनन का दांव खेला। हालांकि, बीएलए का तल्ख रुख प्रेसिडेंट ट्रंप के साथ मुनीर के दांवों को खोखला कर रहा है। बीएलए के लड़ाके काबुल से प्राप्त हुई राइफलों, नाइट-विजन इक्विपमेंट और अन्य आधुनिक हथियारों की मदद से मुनीर की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि मुनीर अमेरिका का पसंदीदा बने रहने के लिए आगे क्या तरकीब आजमाते हैं।

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