US-Iran Peace Talks: कंगाली की मुहाने पर खड़े पड़ोसी मुल्क में भूखमारी चरम पर है। दो वक्त की रोटी के लिए आवाम जद्दोज़हद कर रही है। ईंधन की कीमतें आसमान छू रही है जिसकी वजह से खुदरा बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस बीच पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ लगातार अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के लिए घुटने टेक रहे हैं।
11 अप्रैल को इस्लामाबाद के सेरेना होटल में हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद पाकिस्तान ने फिर अमेरिका और ईरान से गुहार लगाई है। खबर है कि अमेरिकी डेलिगेशन आज प्रस्तावित शांति वार्ता में शामिल होने के लिए इस्लामाबाद पहुंच रहा है। वहीं ईरान ने वार्ता से दूरी बनाने का निर्णय लिया है। इसको लेकर दुनिया भर में गहमा-गहमी बढ़ चुकी है। सवाल है कि क्या दोनों देशों के बीच बात बनेगी?
पीएम शहबाज ने US-Iran Peace Talks के लिए टेके घुटने!
दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकीं हैं जहां कि हुकूमत अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के लिए घुटने टेक चुकी है। ये जगजाहिर है कि कैसे 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच हुई वार्ता विफल रही थी। इसके बाद फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव देखने को मिला। कई कार्गो शिप रोके गए। ईरानी सेना और अमेरिकी नेवी आमने-सामने हुई। इससे पाकिस्तान में आयात भी प्रभावित हुआ है।
इसी क्रम में पीएम शहबाज शरीफ ने फिर शांति वार्ता के लिए घुटने टेक दिए हैं। अमेरिकी डेलिगेशन आज 20 अप्रैल को इस्लामाबाद पहुंच चुका है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और शहबाज शरीफ के बीच इस संबंध में वार्ता होने की खबर है। हालांकि, ईरान अमेरिका की शर्तों पर समझौता के लिए तैयार नहीं है। बावजूद इसके पाकिस्तान लगातार घुटने टेकते हुए दोनों देशों को एक मंच पर लाने की जुगत में जुटा है।
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच क्या बनेगी बात?
मध्य पूर्व में तनाव का दौर जारी है। अमेरिका-ईरान युद्धविराम समझौते की सीमा खत्म होने के बाद फिर आमने-सामने हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के निकट अमेरिकी नेवी ने ईरान की एक कार्गो शिप रोक ली जिसको लेकर बवाल देखने को मिला। ईरानी सेना ने अमेरिका को जमकर फटकार लगाई और जवाबी पलटवार करने की धमकी दी। इस तल्खी के बीच दोनों देशों को पाकिस्तान फिर एक बार मंच देने की जुगत में लगा है।
ईरान सीधे तौर पर अमेरिकी प्रस्तावों को खारिज कर चुका है। मसूद पेजेशकियान कह चुके हैं कि वे अमेरिका की शर्तों पर किसी प्रकार का समझौता नहीं करने जा रहे हैं। ईरान अपने प्रतिद्वंदी अमेरिकी राष्ट्रपति के बदलते रुख और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ईरानी बंदरगाहों पर सेना की नाकेबंदी से परेशान है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच बात नहीं बन पा रही है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि आगे क्या होता है।






