US-India Trade Deal: अमेरिका के एक फैसले ने एक बार फिर भारत की टेंशन बढ़ा दी है। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में भारत और अमेरिका के रिश्तों में लगातार करवाहट देखी जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप लगातार बीच-बीच में भारत को झटका देते रहते है। वहीं अब खबर सामने आ रही है कि अमेरिकी सीनेट ने रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदारों पर और पाबंदियां लगाने और ईरान के खिलाफ़ सज़ा बढ़ाने वाले एक लंबे समय से प्रतीक्षित द्विदलीय बिल को आगे बढ़ाया है।
इससे दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा समर्थित और लंबे समय से अटके पड़े कानून के पारित होने का रास्ता साफ हो गया है। अगर यह बिल पास हो जाता है तो भारत समेत कई देशों की टेंशन बढ़ सकती है।
अमेरिका के नए फैसले से भारत में मचा हड़कंप
जानकारी के मुताबिक अगर यह बिल पास हो जाता है तो अमेरिका की तरफ से भारत, चीन समेत दुनिया के कई देशों पर यूएस 100 प्रतिशत टैरिफ लगा सकता है जो भारत के लिए एक चिंता का विषय है। अमेरिका की तरफ से यह दावा किया गया है कि भारत और चीन लगातार रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीद रहा है और रूस उस पैसों का इस्तेमाल यूक्रेन पर हमले के लिए कर रहा है।
अगर इस बिल की बात करें तो यह बिल ट्रंप को रूसी तेल और गैस के बड़े खरीदारों – खासकर चीन और भारत – से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार भी देगा। यानि अगर बिल पास हो जाता है तो भारत की चिंता बढ़ सकती है।
100 प्रतिशत टैरिफ से भारत की बढ़ सकती है मुश्किलें
अमेरिका की तरफ से भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाता है तो अमेरिका को होने वाला भारतीय निर्यात महंगा हो सकता है। इंजीनियरिंग, स्टील, टेक्सटाइल और अन्य निर्यात क्षेत्रों पर दबाव बढ़ सकता है। भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ने की संभावना रहेगी। वैश्विक सप्लाई चेन और निवेशकों की धारणा पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि, यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी कानून अंतिम रूप लेता है या नहीं और राष्ट्रपति इस अधिकार का उपयोग करते हैं या नहीं। माना जा रहा है कि अगर यह बिल पास हो जाता है तो भारत पर भारी भरकम टैरिफ लग सकता है। वहीं अब देखना होगा कि भारत इस स्थिति से कैसे निपटता है।
