US-Iran Conflict: खाड़ी देशों में एक बार फिर तनावपूर्ण माहौल ने सभी के चेहरे पर शिकन ला दी है। आलम ये है कि शेयर बाजार में हलचल तेज है। वैश्विक स्तर पर चीजें प्रभावित हो रही हैं। इस्लामाबाद में प्रस्तावित शांति वार्ता के विफल होने के बाद यूएस-ईरान कॉनफ्लिक्ट तेजी से बढ़ रहा है। इसी बीच प्रेसिडेंट ट्रंप के निर्देशानुसार व्हाइट हाउस ने बड़ा ऐलान किया है जिसे सुन दुनिया दहल उठी है।
अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया के तमाम देशों को अब रूस और ईरान से कच्चा तेल खरीदने की इजाजत नहीं है। जो छूट पहले दिए गए थे उसकी समय सीमा खत्म होती है। ऐसे में अब दुनिया के तमाम देश रूस-ईरान से कच्चा तेल नहीं खरीद पाएंगे। इसका वैश्विक स्तर पर असर पड़ेगा। भारत भी व्हाइट हाउस के इस फैसले से प्रभावित हो सकता है। आइए सभी पहलुओं पर चर्चा करते हुए इसके बारे में विस्तार से बताते हैं।
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच व्हाइट हाउस के ऐलान से दहल उठी दुनिया!
अमेरिका और ईरान एक बार फिर आमने-सामने हैं। मार्च की शुरुआत के साथ मिडिल ईस्ट में घमासान देखने को मिला था। अमेरिका-ईरान और इजरायल के बीच युद्ध हुई। अंतत: युद्धविराम पर बात बनी है। पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण माहौल के बीच व्हाइट हाउस की ओर से बड़ा ऐलान हुआ है। अमेरिका ने साफ किया है कि रूस और ईरानी कच्चा तेल खरीदने की छूट पर अब विराम लगेगा।
दुनिया के तमाम देश अब सस्ती कीमत पर रूसी और ईरानी कच्चा तेल नहीं खरीद सकेंगे। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के कारण इसकी ढ़ील दी गई थी। हालांकि, अब स्थिति नियंत्रण में है ऐसे में कच्चे तेल की खरीदारी पर मिली छूट को वापस लिया जाता है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि जो देश इसके खिलाफ जाएंगे उन्हें भारी-भरकम टैरिफ का भुगतान करना होगा। ये ऐसा ऐलान है जिससे दुनिया के तमाम देश दहल उठे हैं।
भारत पर कैसे पड़ सकता है प्रभाव?
प्रेसिडेंट ट्रंप के निर्देशानुसार अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि रूस और ईरान से कच्चे तेल की खरीदारी पर मिलने वाला छूट खत्म होता है। कच्चे तेल की आयात के लिए जनरल लाइसेंस को रिन्यू नहीं किया जाएगा। ऐसे में भारत पर भी प्रभाव पड़ सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी की स्थिति में भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में सस्ती दर पर कच्चे तेल की खरीदारी की थी। हालांकि, अब वो विकल्प खत्म हो जाएगा।
ऐसी स्थिति में भारत को रूस के बजाय अमेरिका या अन्य खाड़ी देशों से महंगे दर पर कच्चे तेल की खरीदारी करनी पड़ेगी। इससे ईंधन की कीमतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा सकती है। इसके अलावा रूस को छोड़ अन्य देश से कच्चे तेल की खरीदारी करने पर वर्ष 2026 में भारत का ईंधन बिल $9 बिलियन तक बढ़ सकता है जो सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा।






