US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति लगातार चिंताजनक हो गई है। बताते चले कि यूएस लगातार ईरान पर हमला कर रहा है। जिसके बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई है। दुनिया के कई देशों की टेंशन बढ़ गई है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान की तरफ से बंद कर दिया गया है, तो दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा कर रहे है कि होर्मुज पर वह जल्द कब्जा करने वाले है।
साथ ही अमेरिकी सेना ने लगातार नए हवाई हमले किए हैं, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अनुसार अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी हिस्सों में कई रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में बंदरगाहों के आसपास मौजूद सैन्य ढांचे, निगरानी सुविधाओं और अन्य रणनीतिक स्थानों को निशाना बनाया गया।
अमेरिका के हमले से ईरान में हड़कंप
बता दें कि अमेरिका की तरफ से बीते 6 दिनों से ताबड़तोड़ हमले किए जा रहे है। जिसने दुनिया के कई देशों की टेंशन बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले तेज़ कर दिए और आम लोगों के इस्तेमाल वाले बुनियादी ढांचे, जैसे पुलों और रेलवे स्टेशनों को निशाना बनाया। सीएनएन ने स्थानीय मीडिया के हवाले से बताया कि ईरान के खमीर काउंटी में दो पुलों – गेरीवेह पुल और काहुरेस्टान पुल – पर हमले हुए, ये पुल बंदर अब्बास को शिराज से जोड़ते हैं। फार्स न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, एक रेलवे स्टेशन पर भी हमला हुआ।
ईरान के बंदर अब्बास और आस-पास के गांवों में बिजली की लाइनें भी क्षतिग्रस्त हो गईं, जिसके कारण नेताओं ने नागरिकों से एयर कंडीशनिंग का इस्तेमाल कम करने की अपील की। AP की रिपोर्ट के अनुसार, देश के दक्षिणी हिस्से में अमेरिका के नए हमलों में ईरान में कम से कम सात लोग मारे गए। इसके अलावा ईरान ने आरोप लगाया कि बच्चों के कैंसर अस्पताल पर भी अमेरिका ने निशाना बनाया।
भारत समेत इन देशों पर मंडराया संकट
अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध शुरू हो गया है। जिसके बाद कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है। बताते चले कि ईरान की तरफ से एक बार फिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का ऐलान कर दिया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों पर कई देशों में एनर्जी संकट गहरा सकता है। क्योंकि इस रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल, एलपीजी, एलएनजी की आपूर्ति पूरी की जा रही है। माना जा रहा है कि अगर स्थिति और गंभीर होती है तो भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, यूरोप के कई देश शामिल है। इन देशों की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आने वाले तेल और गैस पर निर्भर करता है। इसलिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी तरह की बाधा का वैश्विक असर पड़ सकता है।
