US-Iran-War के बीच ईरान के इस फैसले से भारत समेत दुनिया के कई देशों में मचेगा हाहाकार, पेट्रोल-डीजल पर मंडराया संकट, समझे इसके मायने

US-Iran-War के बाद ईरान की तरफ से एक ऐसा ऐलान किया गया है, जिसने भारत समेत दुनिया के कई देशों की टेंशन बढ़ा दी है।

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फाइल फोटो

Us-Iran-War: अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुए भीषण युद्ध के बाद ईरान की तरफ से एक ऐसा ऐलान किया गया है, जिसने भारत समेत दुनिया के कई देशों की टेंशन बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि उसने एक “नियम तोड़ने वाले जहाज़” पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं। बाद में ईरान ने घोषणा की कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अगली सूचना तक बंद कर दिया गया है। इसका साफ मतलब है कि वहां से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह से बंद रहेगी और ऐसा ज्यादा दिनों तक रहता है तो कई देशों पर एनर्जी संकट गहरा सकता है। क्योंकि बड़ी मात्रा में इस रास्ते कच्चे तेल और अन्य प्राकृतिक गैसों का आवागमन होता है।

क्यों खास है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

बता दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्ग माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और एलएनजी इसी रास्ते से एशिया, यूरोप और अन्य देशों तक पहुंचता है।

यदि इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट आती है तो वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। भारत ही नहीं बल्कि चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देश भी खाड़ी क्षेत्र से तेल आयात करते हैं। ऐसे में तेल आपूर्ति बाधित होने पर वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर भारत पर भी पड़ सकता है। यदि लंबे समय तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो तेल विपणन कंपनियों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर पड़ सकता है।

भारत ही नहीं, बल्कि चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देश भी खाड़ी क्षेत्र के तेल पर निर्भर हैं। यदि स्ट्रेट
ऑफ होर्मुज प्रभावित होता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है और कई देशों को ईंधन संकट का सामना करना पड़ सकता है।

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