US-Iran War: पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष का दंश पूरी दुनिया झेल रही है। कहीं ईंधन का अकाल पड़ा है, तो कहीं पेट्रोल-डीजल की कीमतों में रिकॉर्ड इजाफा आम आदमी की कमर तोड़ रही है। यूएस-ईरान वॉर के कारण दुनिया तनावपूर्ण मुहाने पर खड़ी है। वैश्विक तेल बाजार भी युद्ध की आग में झुलस रहा है। इसका असर ये है कि कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई है। इसमें ब्रेंट क्रूड $126 प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड इजाफा से वैश्विक मंच पर फिर तनाव बढ़ रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या जंग-ए-मैदान में फिर घमासान छिड़ेगा?
कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचते ही बढ़ा तनाव
अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर हैं। ब्रेंट क्रूड $126 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। एमसीएक्स पर कच्चे तेल का वायदा भाव 10500 रुपए प्रति बैरल से ऊपर चला गया। इससे इतर एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड इजाफे का असर ये है कि विश्व के तमाम देश इसका दंश झेल रहे हैं। कहीं ईंधन की आपूर्ति नहीं हो पा रही है, तो कहीं आसमान छूटी पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने वैश्विक बाजार को अपनी आगोश में ले लिया है। इससे महंगाई भी बढ़ी है और माहौल तनावपूर्ण है।
मिडिल ईस्ट में क्या फिर छिड़ेगा घमासान?
मार्च के प्रथम सप्ताह में ईरान-अमेरिका और इजरायल के बीच भीषण जंग देखने को मिला। अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान को निशाना बनाया और धमाके पर धमाके हुए। लंबे समय तक चली तकरार के बाद पाकिस्तान ने युद्धविराम की मध्यस्थता की जिसके बाद फिलहाल युद्धविराम पर सहमति बनी है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड इजाफा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी और वैश्विक अस्थिरता एक बार फिर मिडिल ईस्ट पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यही वजह है कि अमेरिका-ईरान के बीच फिर घमासान छिड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
