Asim Munir: मिडिल ईस्ट में हो रहे धमाकों की गूंज रावलपिंडी से इस्लामाबाद, कराची तक सुनी जा रही है। आलम ये है कि पाकिस्तानी हुक्मरान और नए सीडीएफ आसिम मुनीर हैरान हैं। खुद पाकिस्तान भी तालिबानियों के हाथों बुरा पिट रहा है। इसी बीच पाकिस्तान में अंदरखाने अली खामेनेई के समर्थन में शोक सभा का आयोजन देखने को मिला। पाकिस्तानी आवाम ने इस दौरान ईरान पर हुए हमले के लिए अमेरिका का विरोध किया।
हालांकि, पीएम शहबाज, ख्वाजा आसिफ, इशाक डार या आसिम मुनीर समेत अन्त तमाम लोग मिडिल ईस्ट की हालिया स्थिति पर चुप हैं। उनके लिए ईरान पर अमेरिका का तल्ख रुख गले की फांस बन रहा है। पाकिस्तान ईरान या अमेरिका में किसे समर्थन दे ये खुद उसके पल्ले नहीं पड़ रहा। अब देखना दिलचस्प होगा कि आसिम मुनीर और पाकिस्तानी हुकूमत कैसे इस संकट से पार पाती है।
मुल्क में अंदरखाने संकट गहराता देख टेंशन में Asim Munir
पाकिस्तान में अंदरखाने संकट गहराता नजर आ रहा है। पाकिस्तानी आवाम सड़कों पर उतर कर डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू का विरोध कर रही है। पाकिस्तानी आवाम की भावनाएं ईरान और दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई से जुड़ी हैं। वहीं आसिम मुनीर के इशारों पर नाचने वाली हुकूमत की मजबूरी अमेरिका के साथ खड़ा होने में है। यही वजह है कि आसिम मुनीर की चिंता बढ़ती जा रही है।
पाकिस्तान अमेरिका या ईरान में किसे समर्थन दे ये सोचकर ही हुक्मरान घबरा रहे हैं। यदि आसिम मुनीर या पाकिस्तानी हुक्मरान अमेरिका के साथ जाते हैं, तो अंदरखाने आवाज उठा रही आवाम उनके लिए चुनौती बनेगी। यदि पाकिस्तान अमेरिका की बजाय ईरान का समर्थन करता है, तो डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि आसिम मुनीर, पीएम शहबाज व अन्य हुक्मरानों की चिंता बढ़ने की बात कही जा रही है।
अफगानी हमलों ने किया पाकिस्तान का हाल-बेहाल!
तालिबानी हुकूमत वाले अफगानिस्तान की ओर से लगातार पाकिस्तान को निशाना बनाया जा रहा है। एक ओर मिडिल ईस्ट में जहां अमेरिका-इजरायल संयुक्त रूप से ईरान को निशाने पर ले रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एशिया में अफगानिस्तान-पाकिस्तान आमने-सामने हैं। आज सुबह भी अफगानिस्तान की ओर से पाकिस्तान के रावलपिंडी में स्थित नूर खान एयरबेस, बलूचिस्तान के क्वेटा और खैबर पख्तूनख्वा के कुछ इलाकों में एयर स्ट्राइक की गई है।
इस ताजा घटनाक्रम ने आसिम मुनीर के साथ पाकिस्तानी हुक्मरानों की चिंता और बढ़ा दी है। यही वजह है कि मिडिल ईस्ट में छिड़े संग्राम के बीच अमेरिका किसे समर्थन देता है। इस पर सबकी नजरें टिकीं हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि खुद युद्ध की मार झेल रहा पाकिस्तान अमेरिका या ईरान में समर्थन के लिए किसे चुनता है या साइलेंट होकर भूमिका निभाता है।






