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Nepal Tibet Flood: सामने पानी का सैलाब, कैसे एक शिक्षक ने बचाई 1643 बच्चों की जान, जानकर चौक जाएंगे आप

नेपाल के एक स्कूल के प्राचार्य ने तेज पानी का सैलाब आने से कुछ मिनट पहले अदम्य साहस का परिचय देते हुए 1643 बच्चों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाकर इंसानियत की मिसाल पेश की है।

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By: Rupesh Ranjan

Published: अगस्त 30, 2026 1:22 अपराह्न | Updated: अगस्त 30, 2026 8:15 अपराह्न

Nepal Tibet Flood
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Nepal Tibet Flood: 26 अगस्त को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल बाढ़ में अब तक  675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2500 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। इन सबके बीच, नेपाल के एक शिक्षक को लेकर चर्चा देश और दुनिया में तूल पकड़ता जा रहा है। अदम्य साहस का परिचय देते हुए विद्यालय के प्राचार्य ने बाढ़ आने से चंद मिनटे पहले, 1643 बच्चों को सुरक्षित जगह पर पहुँचाकर, मानवता को चरितार्थ करने वाला तस्वीर पेश की है। बता दें कि शिक्षक का फैसला तब आया, जब ग्लेशियर से आई एक आपदा ने उस इलाके को तहस-नहस कर दिया और सैकड़ों लोगों की जान ले ली। यह खबर जानने के बाद आज हर कोई नेपाल के इस शिक्षक के बारे में जानना चाहता है, जिसने इंसानियत की मिसाल कायम की है।

नेपाल-तिब्बत बाढ़: कैसे एक शिक्षक ने बचाई 1643 बच्चों की जान

26 अगस्त के सुबह 9:20 बजे नेपाल की त्रिशूली घाटी के करीब नुवाकोट स्थित त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य राजेंद्र दवाडी को एक दोस्त ने संदेश देते हुए कहा कि, ” गांव खत्म हो गया है, नदी उसे ले जाएगी। तुम जल्दी सुरक्षित स्थान पर भागो”। विद्यालय के प्राचार्य राजेंद्र दवाडी कहते हैं कि, उनके तीन मंजिला स्कूल में और उसके आस-पास 1643 बच्चे थे, वह सोच रहे थे कि उनके स्कूल का बिल्डिंग मजबूत हैं। इसी दौरान एक अभिभावक आए और उन्होंने सख्त संदेश सुनाया। इसके तुरंत बाद हमने सभी को लेकर सुरक्षित स्थान पर जाने का फैसला किया। दवाडी बताते हैं कि, मैंने विद्यालय की घंटी बजाई और शिक्षकों को कक्षा खाली करने का आदेश दिया। विद्यालय के बस ड्राइवरों को बुलाया, एक को छोड़कर बाकी सबको वापस जाने को कहा।

कुछ पल में दवाडी देखते हैं कि, बस पुल पार कर रही है, जिस तक वह नहीं पहुँच पाए थे। तब तक, बच्चों को यह एहसास होने लगा था कि, वे बड़े खतरे में हैं। इस दौरान एक लड़की को पैनिक अटैक आया और उसे तुरंत मोटरबाइक पर ऊपर की ओर ले जाया गया। बाकी बच्चे पैदल भाग गए, और दवाडी उनके पीछे-पीछे चलते गए। आखिरकार बच्चों ने एक बोधि पेड़ के नीचे शरण ली। तब तक बाढ़ का पानी प्राचार्य राजेंद्र दवाडी के स्कूल की बिल्डिंग्स को बहा ले गया था।

एक शिक्षक और जेनरेटर ऑपरेटर की मौत – Nepal Tibet Flood

राजेंद्र दवाडी के अदम्य साहस और तेज सोच ने 1643 बच्चों और शिक्षकों के समूह के एक सदस्य को छोड़कर, बाकी सभी को बचा लिया। बताया गया है कि इस आपदा में समाजिक विज्ञान और इतिहास के शिक्षक सैंटोस परियार और विद्यालय जेनरेटर ऑपरेटर सुल्तान लामा को नहीं बचाया जा सका। नेपाल बाढ़ में जान गंवाने वाले त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के समाजिक विज्ञान के शिक्षक, जिनका उम्र 32 वर्ष था, जो नाश्ता बनाने के लिए नदी किनारे स्थित अपने किराए के कमरे में गए थे, वे विनाशकारी बाढ़ में बह गए। स्कूल का जेनरेटर ऑपरेटर सुल्तान लामा विद्यालय का दरवाजा बंद कर, लौटने के बाद इस आपदा का शिकार हो गए।

 

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Rupesh Ranjan

Rupesh Ranjan is an Indian journalist. These days he is working as a Independent journalist. He has worked as a sub-editor in News Nation. Apart from this, he has experience of working in many national news channels.
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