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इजराइल-हमास युद्ध के बीच S Jaishankar का बड़ा बयान, जानें क्या है भारत का रूख?

S Jaishankar: इजराइल के हमलों से गाजा पूरी तरह तबाह और बर्बाद हो रहा है। इजरायली सेना के भीषण बमबारी और गोलीबारी ने हमास के लड़ाकों की कमर तोड़ दी है। बता दें कि जंग को रोकने के लिए कई देश प्रयास कर रहे है। इजराइल हमास युद्ध को अब करीब 5 महीने होने वाले ...

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By: Anurag Tripathi

Published: फ़रवरी 18, 2024 11:53 पूर्वाह्न | Updated: फ़रवरी 18, 2024 12:42 अपराह्न

S jaishankar
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S Jaishankar: इजराइल के हमलों से गाजा पूरी तरह तबाह और बर्बाद हो रहा है। इजरायली सेना के भीषण बमबारी और गोलीबारी ने हमास के लड़ाकों की कमर तोड़ दी है। बता दें कि जंग को रोकने के लिए कई देश प्रयास कर रहे है। इजराइल हमास युद्ध को अब करीब 5 महीने होने वाले है। इस बीच भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर का एक बड़ा बयान सामने आया है।

विदेश मंत्री S Jaishankar ने क्या कहा?

विदेश मंत्री S Jaishankar ने शनिवार को कहा कि भारत कई दशकों से फिलिस्तीन मुद्दे के दो-राज्य समाधान पर जोर दे रहा है, और अब बड़ी संख्या में देश न केवल इसका समर्थन कर रहे हैं, बल्कि इसे पहले की तुलना में अधिक जरूरी मान रहे हैं। दरअसल उन्होंने म्यूनिख में एक सुरक्षा सम्मेलन में अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और जर्मन विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक की उपस्थिति में एक इंटरैक्टिव सत्र में यह टिप्पणी की।

आपको बता दें कि विदेश मंत्री S Jaishankar ने 7 अक्टूबर को हमास द्वारा इजरायली शहरों पर किए गए हमलों को “आतंकवाद” बताया, लेकिन साथ ही तेल अवीव की प्रतिक्रिया का जिक्र करते हुए कहा कि मानवीय कानून का पालन करना इजराइल का अंतरराष्ट्रीय दायित्व है।

इजराइल- हमास युद्ध पर क्या है भारत का रूख?

इजराइल हमास युद्ध पर चर्चा करते हुए S Jaishankar ने कहा इसके विभिन्न आयाम हैं, और उन्हें मोटे तौर पर चार बिंदुओं में वर्गीकृत किया गया है।

●हमें स्पष्ट होना चाहिए कि 7 अक्टूबर को जो हुआ वह आतंकवाद था। कोई चेतावनी नहीं, कोई औचित्य नहीं, कोई स्पष्टीकरण नहीं। यह आतंकवाद था।

●जैसा की इजराइल ने प्रतिक्रिया दी है, यह महत्वपूर्ण है कि इजराइल को नागरिक हताहतों के प्रति बहुत सावधान रहना चाहिए। मानवीय कानून का पालन करना उसका अंतरराष्ट्रीय दायित्व है।

●उन्होंने कहा कि आज बंधकों की रिहाई जरूरी है।

●राहत प्रदान करने के लिए एक मानवीय गलियारे, एक स्थायी मानवीय गलियारे की आवश्यकता है। और अंतत एक स्थायी समाधान, एक दीर्घकालिक समाधान होना चाहिए। अन्यथा हम एक पुनरावृत्ति देखने जा रहे हैं।

बता दें कि विदेश मंत्री ने फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत की लंबे समय से चली आ रही स्थिति पर भी प्रकाश डाला।

कब शुरू हुआ इजराइल-हमास का युद्ध?

S Jaishankar
फाइल फोटो प्रतिकात्मक

आपको बता दें कि इजराइल हमास के बीच युद्ध 7 अक्टूबर 2023 से शुरू हुआ। जब हमास के लड़ाको ने इजराइल में घुसकर हमला किया। खबरों के मुताबिक हमास ने इजराइल में लगभग 1200 लोगों को मार डाला और 220 से अधिक अन्य लोगों का अपहरण कर लिया, जिनमें से कुछ को संक्षिप्त युद्धविराम के दौरान रिहा कर दिया गया। गाजा में हमास द्वारा संचालित अधिकारियों के अनुसार, इजरायली हमले के कारण, गाजा में 25000 से अधिक लोग मारे गए हैं। आपको बताते चले कि भारत शुरू से ही फिलिस्तीन मुद्दे के दो-राज्य समाधान की दिशा में सीधी शांति वार्ता को जल्द से जल्द फिर से शुरू करने के लिए स्थितियां बनाने का आह्वान करता रहा है।

क्या है पूरा विवाद?

●1948 की जंग में फिलिस्‍तीन का काफी सारा हिस्‍सा इजराइल के कब्‍जे में चला गया था। 1949 में एक आर्मीस्‍टाइस लाइन खींची गई, जिसमें फिलिस्‍तीन के 2 क्षेत्र बने- वेस्‍ट बैंक और गाजा।

●बता दें कि वेस्ट बैंक इजराइल के पूर्व में स्थित है, जहां करीब 30 लाख फिलिस्तीनी रहते हैं। इनमें से ज्यादातर मुस्लिम, अरब हैं। वेस्ट बैंक में कई यहूदी पवित्र स्थल हैं, जहां हर साल हजारों तीर्थयात्री आते हैं।

●येरुशलम विवादित क्षेत्रों के केंद्र में है, जिसको लेकर दोनों देशों के बीच शुरू से ही ठनी हुई है। इजरायली यहूदी और फिलिस्तीनी अरब, दोनों की पहचान, संस्‍कृति और इतिहास येरुशलम से जुड़ी हुई है। दोनों ही इस पर अपना दावा करते हैं।

●यहां की अल-अक्‍सा मस्जिद, जिसे यूनेस्‍को ने विश्व धरोहर घोषित कर रखा है, दोनों के लिए बेहद अहम और पवित्र है। इस पवित्र स्‍थल को यहूदी ‘टेंपल माउंट’ बताते हैं, जबकि मुसलमानों के लिए ये ‘हरम् अल् -शरीफ्’ है। यहां मौजूद ‘डोम ऑफ द रॉक’ को यहूदी धर्म में सबसे पवित्र धर्म स्थल कहा गया है, लेकिन इससे पैगंबर मोहम्मद का जुड़ाव होने के कारण मुसलमान भी इसे उतना ही अपना मानते हैं।

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Anurag Tripathi

अनुराग त्रिपाठी को पत्रकारिता का 2 साल से अधिक का अनुभव है। उन्होंने महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से अपनी पत्रकारिता की डिग्री प्राप्त की है। वह बिजनेस, यूटिलिटी, पॉलिटिक्स विषयों पर लिखने में रूचि रखते है। वर्तमान में वह डीएनपी इंडिया के साथ कार्यरत है।
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