Hydrogen Train: वंदे भारत, राजधानी नही, पहाड़ों पर इस अनोखी ट्रेन का होगा संचालन, खासियत जान रह जाएंगे दंग

Hydrogen Train: भारतीय रेलवे लगातार अपनी ट्रेनों को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

Hydrogen Train

फाइल फोटो

Hydrogen Train: भारतीय रेलवे लगातार अपनी ट्रेनों को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी बीच रेलवे ने एक ऐसा अनोखा फैसला लिया है, जिसके बाद चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। दरअसल रेलवे पहाड़ों पर Hydrogen Train चलाने पर विचार कर रही है।

मालूम हो कि अभी जींद से सोनीपत के बीच ये ट्रेन चलाई जा रही है। सबसे खास बात है कि इस ट्रेन को चलाने में ना तो बिजली की जरूरत पड़ती है और ना ही डीजल की, माना जा रहा है कि इसी वजह से रेलवे ने यह फैसला लिया है, क्योंकि पहाड़ों पर बिजली की काफी दिक्कत है।

पहाड़ों पर चलेगी हाइड्रोजन ट्रेन?

भारतीय रेलवे ने आधिकारिक तौर पर बताया है कि जींद-सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना से मिले अनुभव के आधार पर हेरिटेज रेलवे, खासकर कालका-शिमला रूट, पर हाइड्रोजन तकनीक के इस्तेमाल की संभावना तलाश की जा रही है। कालका-शिमला रेलवे भारत की प्रसिद्ध पर्वतीय रेल लाइनों में शामिल है। यह यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का हिस्सा ‘है।

पहाड़ी इलाकों में बिजली की ओवरहेड लाइन बिछाना कई जगह तकनीकी और पर्यावरणीय रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए हाइड्रोजन जैसी वैकल्पिक तकनीक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। भारतीय रेलवे ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि “पहाड़ों में दौड़ेगी हाइड्रोजन ट्रेन! रेलवे की 35 ट्रेनों की तैयारी, बढ़ेगा ग्रीन रेल नेटवर्क”।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन में क्या है खास?

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन एक 10-कोच वाली ट्रेन है। इसमें दोनों सिरों पर हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार लगाई गई हैं और दोनों मिलकर 2,400 किलोवाट की शक्ति देती हैं। ट्रेन में लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियों और हाइड्रोजन सिलेंडरों का भी इस्तेमाल किया गया है।

इस ट्रेन की यात्री क्षमता करीब 2600 यात्रियों की बताई गई है। जींद-सोनीपत सेक्शन पर इसकी परिचालन गति 75 किमी प्रति घंटे है, जबकि ट्रेन को अधिकतम 110 किमी प्रति घंटे की गति के लिए डिजाइन किया गया है।

 

Exit mobile version