Neal Katyal: यूएस सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को तगड़ा झटका देते हुए टैरिफ को अवैध करार दिया है। इसी बीच एक नाम की काफी चर्चा हो रही है, वह है नील कत्याल, दरअसल कत्याल एक भारतीय प्रवासी है। जानकारी के मुताबिक नील कात्याल का जन्म शिकागो में हुआ था और वो भारतीय अप्रवासी पेरेंट्स के बेटे हैं। उनके पिता एक इंजीनियर हैं तो मां डॉक्टर हैं। बताते चले कि कत्याल अमेरिका के पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नील कात्याल ने ट्रंप द्वारा 1977 के अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) का उपयोग करके लगभग हर व्यापारिक साझेदार से आयात पर “अन्यायपूर्ण, असंवैधानिक कर” लगाने के खिलाफ तर्क दिया। जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप टैरिफ को अवैध करार दिया। चलिए आपको बताते है कि कौन है नील कत्याल?
कौन Neal Katyal जिसने डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ खोला मोर्चा?
बताते चले कि नील कत्याल एक भारतीय प्रवासी है। उन्होंने डार्टमाउथ कॉलेज से ग्रेजुएशन और येल लॉ स्कूल से कानून की पढ़ाई की। जानकारी के मुताबिक साल 2010 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उन्हें एक्टिंग सॉलिसिटर जनरल अपॉइंट किया. इस पद पर रहते हुए वे अमेरिकी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दलीलें पेश करते थे। इसके अलावा उन्हें कई अवॉर्ड से नवाजा गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नील कत्याल ने जाहिर की खुशी
नील कत्याल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि “आज, अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने कानून के शासन और पूरे अमेरिका में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की। उसका संदेश सीधा था: राष्ट्रपति शक्तिशाली होते हैं, लेकिन हमारा संविधान उससे भी कहीं अधिक शक्तिशाली है। अमेरिका में, केवल कांग्रेस ही अमेरिकी जनता पर कर लगा सकती है।अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने हमारे कानूनी मामले में हमारी हर मांग पूरी की। हर एक चीज़।
My statement:
“Today, the U.S. Supreme Court stood up for the rule of law and Americans everywhere. Its message was simple: Presidents are powerful, but our Constitution is more powerful still. In America, only Congress can impose taxes on the American people.The US Supreme…
— Neal Katyal (@neal_katyal) February 20, 2026
मैं लिबर्टी जस्टिस सेंटर के नेतृत्व का आभारी हूं, और विशेष रूप से इसकी अध्यक्ष सारा अल्ब्रेक्ट के शानदार समर्थन का, जिन्होंने तब लड़ाई का नेतृत्व किया जब दूसरे पीछे हट रहे थे और हमारे संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा में निडर रहीं। मैं उन पांच छोटे व्यवसाय मालिकों का भी आभारी हूं जिन्होंने इन अन्यायपूर्ण, असंवैधानिक करों के खिलाफ आवाज उठाई। स्टैंड लेकर, उन्होंने देश भर में हजारों व्यवसायों और लाखों उपभोक्ताओं को महत्वपूर्ण राहत दिलाई है।






