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भारत के Chandrayaan-3 पर होगी दुनिया की नजर, मिशन से संबंधित सभी प्रमुख बातों को जानें   

Chandrayaan-3: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने Chandrayaan-3 के लांचिंग की घोषणा कर दी है। ऐसे में पूरी दुनिया इस बात को जान चुकी है, कि भारत (India) श्रीहरिकोटा से 14 जुलाई 2023 को दोपहर 2.35 मिनट पर सबसे बहुप्रतीक्षित मिशन Chandrayaan-3 की लॉन्चिंग करने वाला है। ऐसे में यह मिशन भारत के लिए ही ...

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By: Saurabh Mall

Published: जुलाई 11, 2023 12:07 अपराह्न | Updated: जुलाई 11, 2023 1:05 अपराह्न

Chandrayaan-3
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Chandrayaan-3: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने Chandrayaan-3 के लांचिंग की घोषणा कर दी है। ऐसे में पूरी दुनिया इस बात को जान चुकी है, कि भारत (India) श्रीहरिकोटा से 14 जुलाई 2023 को दोपहर 2.35 मिनट पर सबसे बहुप्रतीक्षित मिशन Chandrayaan-3 की लॉन्चिंग करने वाला है। ऐसे में यह मिशन भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए अहम माना जा रहा है। भारत ने अपने अथक प्रयास और कड़ी मेहनत की वजह से Chandrayaan-2 के बाद सिर्फ 4 सालों के भीतर Chandrayaan-3 की लॉन्चिंग करने जा रहा है। ऐसे में यह बात अहम् हो जाती हैं, कि आखिरकार Chandrayaan- 3 में इस बार क्या खासियत है? यह चंद्रमा पर लैंडिंग करने से पहले और लैंडिंग करने के बाद क्या कुछ करने वाला है। 

Chandrayaan-3 की सबसे प्रमुख बातें? 

बता दें कि 22 जुलाई 2019 को लांच हुआ चंद्रयान-2 का अगला चरण ही चंद्रयान-3 है। भारत (ISRO) ने इसे 4 सालों की कड़ी मेहनत के बाद Chandrayaan-3 को लॉन्च करने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक चंद्रयान-2 का अपग्रेडेड सिस्टम है Chandrayaan-3. ऐसे में हमारा (ISRO) का यह मिशन पहले से ज्यादा प्रभावी और बेहतरीन होने वाला है। खबरों की मानें तो Chandrayaan-3 मून की सतह पर उतरकर  उसका बारीकी से परीक्षण करेगा। वह वहां से तस्वीरें, मिट्टी की क्वालिटी, वातावरण का स्वभाव, केमिकल एनालिसिस के साथ-साथ, वहां मौजूद खनिज पदार्थों के बारे में पता लगाएगा। इसके अलावा इसमें चंद्रयान-2 की तरह ही चंद्रयान-3 में एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर फीड किया गया है, जो उसी तर्ज पर अपग्रेड होकर कार्य करेगा। 

Chandrayaan-3 की तैयारी का वीडियो देखें

इस बार Chandrayaan-3 क्या अलग है?  

आप सभी को पता है, Chandrayaan-2 की लैंडिंग पिछली बार थोड़ी ठीक नहीं हुई थी। ऐसे में इसरो के वैज्ञानिक इस बार कोई गलती नहीं करना चाहते है। जानकारी के मुताबिक इस बार उन्होंने चंद्रयान-3 के जरिए भेजे जाने वाले रोवर को मून के वातावरण के मुताबिक बनाया गया है, ताकि उसे लैंडिंग करने में कोई भी दिक्कत का सामना न करना पड़े। उसमे 6 पहिए लगाए गए हैं, साथ ही इसमें पावरफुल सोलर पैनल के साथ-साथ कई कैमरे भी लगाए गए है। ऐसे में कुल मिलाकर देखा जाए तो वैज्ञानिकों का इस बार पूरा फोकस चंद्रयान की सुरक्षित लैंडिंग पर है।  

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Saurabh Mall

सौरभ कुमार मल्ल बीते 2 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। इन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया केंद्रीय विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में P.G. की पढ़ाई की है। उन्होंने अपनी शुरुआत दैनिक भास्कर (इंटर्नशिप) से किया है। यह कई और चैनलों में बतौर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर चुके हैं। फिलहाल सौरभ DNP India Hindi वेबसाइट में बतौर कंटेंट राइटर (पॉलिटिकल, क्राइम और इंटरनेशनल) डेस्क पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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