Jantar Mantar Protest: जंतर मंतर इन दिनों चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। लगातार यहां पर आंदोलन का आग धधक रही है। इसी बीच बीते दिन जंतर मंतर पर सवर्ण समाज बड़ी संख्या में जुटे और आरक्षण में बदलाव को विरोध प्रदर्शन किया। इसके अलावा राजस्थान में तो भारी भीड़ देखने को मिली थी।
वहीं शाम को पुलिस ने आरक्षण व्यवस्था खत्म करने की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को वहां से हटा दिया। इस कार्रवाई के दौरान एक प्रदर्शनकारी बेहोश हो गया। दिल्ली पुलिस के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स की भी भारी संख्या में तैनाती की गई थी, ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
आरक्षण हटाओ आंदोलन पर क्या बोले अजित भारती?
न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए यूट्यूबर अजीत भारती ने कहा कि “हमारी सबसे बड़ी मांग है कि सरकार एक श्वेत पत्र (white paper) लाए जिसमें यह बताया जाए कि जो आरक्षण आपने 80 सालों से लोगों को दिया है। मैं बिहार से आता हूं। ज़रा रिसर्च करके देखिए कि मुसहर समुदाय की हालत कितनी खराब है। उनके बच्चों को आरक्षण नहीं मिल रहा है। क्यों? क्योंकि उन जाति समूहों के पास नेता ही नहीं हैं।
#WATCH | Delhi: On the Jantar Mantar protest against caste-based reservation, YouTuber Ajeet Bharti says, “Our biggest demand is that the government should come up with a white paper stating that the reservations you’ve given to people for 80 years… I come from Bihar. Research… pic.twitter.com/Auucz8VAaH
— ANI (@ANI) August 21, 2026
दूसरी मांग है कोटे के अंदर कोटा, जिस पर सरकार ने यह भी कहा है कि हम इसमें ‘क्रीमी लेयर’ लागू नहीं करेंगे। आप इसे लागू क्यों नहीं करेंगे? यह कितनी अजीब बात है कि सरकार उन कुछ दलित नेताओं के आगे झुक रही है जो सिर्फ़ अपनी जाति समूह की बात करते हैं। तीसरी मांग है न्यूनतम अंक की।
आप मेरिट से समझौता करके विकसित भारत का सपना नहीं बेच सकते। अगर 50% काबिल युवा या पढ़ने वाले लड़के-लड़कियों को आईआईटी, आईआईएम या उच्च शिक्षा में दाखिला नहीं मिलेगा, तो आपकी कार्यक्षमता वहीं 50% कम हो जाएगी”।
क्या है प्रदर्शनकारियों की मांग?
आरक्षण हटाओ आंदोलन से जुड़े प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव से जुड़ी है। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति चाहे किसी भी जाति से हो, उसे सरकारी सहायता और अवसरों में प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान ‘गरीबों को आरक्षण, जाति के आधार पर नहीं’ जैसे नारे भी लगाए गए। कुछ प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी के इक्विटी संबंधी नियमों का भी विरोध किया। हालांकि अब देखना होगा कि आने वाले दिनों क्या आंदोलन आगे बढ़ता है या फिर सरकार इसमे दखल देती है।







