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Bihar Caste Survey: बिहार में जातीय सर्वे पर अब 6 अक्टूबर को होगी सुनवाई, सर्वेक्षण के आंकड़ों पर SC ने रोक लगाने से किया इनकार

Bihar Caste Survey: बिहार में जातीय सर्वेक्षण का मामला एक बार फिर चर्चाओं में है। बीते दिनों ही सर्वेक्षण के आंकड़े जारी किए गए हैं। जिस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच खबर आई सुमीर्म कोर्ट अब इस मामले पर 6 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। ये मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट ...

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By: Dinesh Verma

Published: अक्टूबर 3, 2023 7:12 पूर्वाह्न

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Bihar Caste Survey: बिहार में जातीय सर्वेक्षण का मामला एक बार फिर चर्चाओं में है। बीते दिनों ही सर्वेक्षण के आंकड़े जारी किए गए हैं। जिस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच खबर आई सुमीर्म कोर्ट अब इस मामले पर 6 अक्टूबर को सुनवाई करेगा। ये मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़ा है। कोर्ट ने सर्वे के आंकड़े जारी करने पर कोई रोक नहीं लगाई थी। कोर्ट का कहना था कि वह रोक का आदेश विस्तृत सुनवाई के बाद ही देगा।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में क्या कहा?

दरअसल, इस मामले में सुनवाई मंगलवार को होनी थी। मामले को लेकर याचिकाकर्ता ने अदालत को सूचित किया कि बिहार सरकार ने इस मामले की सुनवाई के दौरान ही जातीय सर्वेक्षण का डेटा जारी कर दिया है। जिसके बाद कोर्ट ने शुक्रवार, 6 अक्टूबर को मामले की सुनवाई तय की है।

क्या कहते हैं जातीय सर्वेक्षण के आंकड़े

बिहार कास्ट सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की 13 करोड़ से अधिक की आबादी में ओबीसी 27.13 प्रतिशत, अत्यंत पिछड़ा वर्ग 36.01 प्रतिशत और सामान्य वर्ग 15.52 प्रतिशत है। भूमिहार की आबादी 2.86 प्रतिशत, कुर्मी की आबादी 2.87 प्रतिशत, ब्राह्मणों की आबादी 3.66 प्रतिशत, राजपूतों की आबादी 3.45 प्रतिशत, मुसहर की आबादी 3 प्रतिशत और यादवों की आबादी 14 प्रतिशत है।

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में 81.99 फीसदी हिंदू, 17.70 फीसदी मुस्लिम, 0.5 फीसदी ईसाई, 0.11 सिख, 0.0096 जैन समुदाय, 0.0851 बौद्ध और 0.1274 फीसदी अनुयायी हैं. अन्य धर्मों के. इसके अलावा, 2146 लोग गैर-धार्मिक के रूप में पहचान करते हैं।

ऐसे कोर्ट पहुंचा था मामला

बता दें कि पटना हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर कोर्ट से जाति जनगणना के आंकड़ों को जारी करने पर रोक लगाने की मांग की गई थी। मामले की सुनवाई और उसके पक्ष में फैसला सुनाने के बाद अदालत ने बिहार सरकार की कार्रवाई को कानूनी रूप से वैध माना था। इसके बाद बिहार सरकार की ओर से जाति सर्वेक्षण परियोजना शुरू की गई थी।

कोर्ट के फैसले से संतुष्ट न होकर याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से पटना हाई कोर्ट के इस फैसले को पलटने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि रिपोर्ट को इस समय सार्वजनिक न किया जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया था। अब इस मामले में 6 अक्टूबर को सुनवाई होगी।

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