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Justice Lalit के कार्यकाल में बदले हैरान करने वाले सुप्रीम कोर्ट के नियम, 1000 से अधिक रुके हुए मामलों की हुई वापसी, जानें डिटेल्स

Justice Lalit: छोटे से कार्यकाल में भी एक जस्टिस कुछ इस कदर अपनी छाप छोड़ने में कामयाब रहे जिसका जिक्र आज भी किया जाता है। पूर्व जज ने उनकी तारीफ करते हुए आखिर क्या कहा आइए जानते हैं पूरी खबर क्या है।

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By: Anjali Wala

Published: अक्टूबर 26, 2026 12:35 अपराह्न

Justice Lalit
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Justice Lalit: पूर्व जज संजय किशन कौल की किताब ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ में सुप्रीम कोर्ट के प्रशासनिक सुधार और उनके कामकाज में किन-किन चीजों का बदलाव किया गया इसका जिक्र किया गया। निश्चित तौर पर छोटे से कार्यकाल में जस्टिस ललित ने कई ऐसे चौंकाने वाले फैसले लिए जो हमेशा के लिए याद रखे जाएंगे। ऐसे मामले जिन्हें लंबे समय तक स्थगित रखा गया था और उस पर किसी ने ध्यान नहीं है दिया उसे जस्टिस ललित ने सामने रखा। सभी रुके हुए मामलों को दोबारा शुरू करने का आदेश दिया। जानिए उनके कार्यकाल में क्या खास रहा जिसका जिक्र पूर्व जज करते हुए नजर आए हैं।

पुराने लंबित मामलों को लेकर जस्टिस ने किया बड़ा काम

रिपोर्ट में बताया जाता है कि जस्टिस ललित ने हजारों से मामले को संवेदनशील बता कर एक बार फिर से जांच के लिए लिस्ट में शामिल किया जिसे पूर्व सीजेआई एन.वी. रमना के कार्यकाल में रोक दिया गया था। दोबारा से सुनवाई के लिए जारी किया और इस पर जिस तरह से संज्ञान लिया वह आज भी याद किया जाता है। उन्होंने अपने छोटे से कार्यकाल में एक बड़ा परिवर्तन लाने का काम किया। उन्होंने कई जजों की अलग-अलग बेंच बने ताकि लंबित मुद्दों को तेजी से सुनवाई के लिए लगाया जाए। परिणाम भी काफी खास निकला जहां कई पुराने मामले निपटाए गए।

 

Justice Lalit ने किए कई ऐतिहासिक काम

पूर्व जज के किताबी संस्करण में इस बात का जिक्र किया गया है कि जस्टिस जस्टिस ललित ने यह ध्यान रखा कि संविधान पीठ में बैठने का मौका सिर्फ कुछ खास लोगों तक ही सीमित न रहे। उनके मुताबिक जजों को भी यह अवसर मिलना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने नियुक्ति की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जा सके इसके लिए भी काम किया। हालांकि जस्टिस कौल ने जस्टिस ललित के इन सभी अच्छे कदमों की खुलकर तारीफ की है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि सिर्फ रोज के मामलों के निपटारे के बड़े-बड़े आंकड़ों या लक्ष्यों को ही किसी अदालत की सफलता का एकमात्र पैमाना नहीं माना जा सकता। उन्होंने हर दिशा में काम किया।

इस किताब में प्रशासनिक सुधारों और जस्टिस ललित के कामकाज के असर पर विस्तार से चर्चा की गई है।

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Anjali Wala

अंजलि वाला पिछले कुछ सालों से पत्रकारिता में हैं। साल 2019 में उन्होंने मीडिया जगत में कदम रखा। फिलहाल, अंजलि DNP India वेब साइट में बतौर Sub Editor काम कर रही हैं। उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से हिंदी पत्रकारिता में मास्टर्स किया है।
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