किसानों के साथ पशुपालकों को भी सशक्त कर रही Mohan Yadav सरकार! गेहूं उपार्जन को गति देकर बदली कृषि जगत की तस्वीर

सीएम Mohan Yadav के नेतृत्व वाली सरकार राज्य में किसानों के साथ पशुपालकों को भी सशक्त कर रही है। इसी क्रम में गेहूं उपार्जन को गति दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक किसानों तक लाभ पहुंचे।

Mohan Yadav

Picture Credit: गूगल (सांकेतिक तस्वीर)

Mohan Yadav: मध्य प्रदेश में किसानों के साथ पशुपालकों को भी सशक्त करने का दौर जारी है। इस क्रम में मंडियों में गेहूं की खरीदारी को गति दी जा रही है। किसानों को भावान्तर योजना का लाभ भी उपलब्ध कराया जा रहा है। सीएम मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार की कोशिश है कि कृषि जगत की तस्वीर बदले। इसमें सरकार सफल साबित होती नजर आ रही है। मोहन यादव की सरकार द्वारा राज्य के मिल्क कैपिटल बनाने की कवायद भी जारी है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि ताकि पशुपालक किसानों भी सशक्त हो सकें और उनकी दशा-दिशा बदले।

किसानों के साथ पशुपालकों को भी सशक्त कर रही Mohan Yadav सरकार!

मध्य प्रदेश की सरकार राज्य के किसानों के साथ पशुपालकों को भी सशक्त करने का काम कर रही है।

इस क्रम में तमाम नई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। किसानों तक सम्मान निधि की पहुंच सुनिश्चित की जा रही है। उनके फसलों की सरकारी मंडियों में खरीदारी बेहतर तरीके से हो रही है। उन्हें कृषि यंत्र से लेकर खाद्य सामग्री तक मुहैया कराया जा रहा है। मंडियों में गेहूं उपार्जन का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। पशुपालकों को भी सरकार गौशाला खोलने के लिए 10 लाख तक का लोन मुहैया करा रही है। ये सारे कदम किसानों और पशुपालकों को सशक्त करने का काम कर रहे हैं। इससे उनकी दशा-दिशा बदली है जो राज्य की तस्वीर बदल रही है।

गेहूं उपार्जन को गति देकर बदली कृषि जगत की तस्वीर

राज्य में गेहूं उपार्जन को गति देकर सीएम मोहन यादव की सरकार कृषि जगत की तस्वीर बदल रही है। किसानों को 2625 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं उपार्जन पर भुगतान किए जा रहे हैं। 9 मई तक मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में स्थित सरकारी क्रय केन्द्रों पर 56.45 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदी जा चुकी है। 9.38 लाख किसान अब तक अपनी फसल बेच चुके हैं। 23 मई तक स्लॉट बुकिंग कर किसान अपनी बची गेहूं एमएसपी पर बेच सकते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि इस वर्ष 100 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदकर किसानों को लाभान्वित किया जाए। इससे कृषि जगत की तस्वीर बदल रही है।

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