Maharashtra Politics: ओमराजे निंबालकर और संजय अष्टिकर ने अपनी राजनीतिक मजबूरी और इलाके के विकास (फंड) का हवाला देते हुए उद्धव ठाकरे का गुट छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना का दामन थामने का फैसला किया है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी के लिए झटके से कम नहीं है लेकिन सांसदों ने पार्टी का दामन छोड़ने से पहले कहा कि उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे से कोई परेशानी नहीं है। बल्कि उन्हें शिवसेना के नेता संजय रावत और अन्य नेताओं द्वारा उनके खिलाफ दिए गए बयानबाजी को लेकर नाराजगी है। आइए जानते हैं महाराष्ट्र पॉलिटिक्स में पूरी डिटेल्स।
Maharashtra Politics में कैसे आया और भूचाल
बागी सांसद ओमराजे निंबालकर ने साफ किया कि उन्हें उद्धव ठाकरे से कोई शिकायत नहीं है बल्कि वे संजय राउत की बयानबाजी और राजनीतिक मजबूरियों के कारण यह कदम उठा रहे हैं। बता दे कि दो तिहाई सांसदों का आंकड़ा पूरे होने की वजह से बागी सांसदों पर दल बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई होना मुश्किल है। अगर ओमराजे शिवसेना यूबीटी का साथ नहीं छोड़ते तब शायद महाराष्ट्र पॉलिटिक्स में और घमासान हो सकता था।
क्यों उद्धव ठाकरे की शिवसेना को छोड़ने का लिया फैसला
रिपोर्ट की माने तो ओमराजे निंबालकर ने अपने गांव गोवर्धनवाड़ी में वहां के स्थानीय नेताओं से एक मीटिंग की। इस दौरान बताया कि उन्हें उद्धव ठाकरे से कोई परेशानी नहीं है लेकिन वह फंड की कमी को की वजह से तत्कालीन सरकार का दामन थाम रहे हैं। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि वह किसी लालच या पैसे के लिए नहीं बल्कि अपने राजनीतिक अस्तित्व और विभाग के विकास के लिए एकनाथ शिंदे की शिवसेना ज्वाइन कर रहे हैं।
कैसे राजनीति की वजह से शिवसेना में आई टूट
वहीं संजय अष्टिकर ने भी फेसबुक के जरिए शिवसेना ज्वाइन करने की बात की और बताया कि विपक्ष में रहने की वजह से उन्हें अपने क्षेत्र में विकास के कामों के लिए फंड्स और अप्रूवल नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह से वह कोई भी काम नहीं कर पा रहे हैं और ऐसे में पॉलिटिकल अस्तित्व को बचाने के लिए उन्हें ऐसा करना कर रहा है।
