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Muharram 2023 पुरानी दिल्ली में निकाले गए मुहर्रम ताजिया और जुलूस, बड़ी संख्या में उमड़ा जनसैलाब

Muharram 2023: आज का दिन दुनियाभर में मौजूद सिया मुसलमानों के लिए बेहद गम और मातम से भरा दिन है। मोहर्रम के महीने में ही पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन अपने परिवार के साथ कर्बला की जंग में शहीद हुए थे। दिसके कारण आज के दिन दुनिया भर में मातम मनाया जाता ...

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By: ROZY ALI

Published: जुलाई 29, 2023 4:37 अपराह्न

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Muharram 2023: आज का दिन दुनियाभर में मौजूद सिया मुसलमानों के लिए बेहद गम और मातम से भरा दिन है। मोहर्रम के महीने में ही पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन अपने परिवार के साथ कर्बला की जंग में शहीद हुए थे। दिसके कारण आज के दिन दुनिया भर में मातम मनाया जाता है।

पुरानी दिल्ली में निकाला गया मुहर्रम ताजिया जुलूस

इसी कड़ी में पुरानी दिल्ली में मुहर्रम के मौके पर भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ताजिया जुलूस निकाला गया। यहां पर बड़ी संख्या में सिया लोग मौजूद थे।

देश के प्रधानमंत्री मोदी ने किया ट्विट

पीएम मोदी ने कर्बला की शहादत पर ट्विट करते हुए लिखा कि, “हम हज़रत इमाम हुसैन (एएस) के बलिदान को याद करते हैं। न्याय और मानवीय गरिमा के आदर्शों के प्रति उनका साहस और प्रतिबद्धता उल्लेखनीय है।”

यौम-ए-आशूरा क्या है?

आज मुहुर्म की दसवीं तारीख यौम-ए-आशूरा है। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग इमाम हुसैन और  हजरत इमाम हसन के साथ उनके परिवार में शहीद हुए लोगों को याद करते हैं। इस दिन सिया धर्म के लोग कर्बला के उस भयानक मंजर को दोहराते हैं और खुद को जख्मी भी करते हैं।

ताजिया क्यों निकाला जाता है

कर्बला के शहीदों को याद करते हुए ताजिया निकाला जाता है और इमामबाड़े में जाकर उन्हें दफन किया जाता है। आपको बता दें, ताजिये का जुलूस इमामबारगाह से निकालता है और कर्बला में जाकर खत्म होता है। ताजिया हजरत इमाम हुसैन की कब्र के रुप में निकालता है।

कर्बला का इतिहास

आपको बता दें, 680 ईस्वी में मोहर्रम की 10वीं तारीख यानि की आज के ही दिन कर्बला के मैदान में यजीद और पैगंबर अली के परिवार के बीच में जंग हुई थी, जिसमें अंत तक लड़ते-लड़ते मुहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन अपने 72 साथियों के साथ शहीद हुए थे। इस शहादत को याद करते हुए सिया लोग जूलुस निकालते हैं और उस दिन को याद करते आंसू बहाते हैं।

क्या है आशूरा

सिया लोग इस दिन काले कपड़े पहने हैं और खंजर से खुद को जख्मी करते हुए कर्बला की जंग पर मातम मनाते हैं। इस दिन मातम के साथ-साथ जगह-जगह लंगर और शरबत बांटा जाता है। मनाने का उद्देश्य इमाम हुसैन के इंसानियत से भरे संदेश और उनके समर्पण को दुनिया तक पहुंचाना है।

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