Vaishno Devi Medical College: देश का एक ऐसा हिस्सा जहां भीषण बर्फबारी ठंड को रफ्तार दे रही है। वहां एक मुद्दे को लेकर सियासत गरमा गई है। पूरा मामला जम्मू के रियासी में स्थित माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स संचालित करने की अनुमति रद्द करने से जुड़ा है। वो 50 छात्र जिन्होंने पहले बैच के रूप में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस में दाखिला लिया था।
अब उनका भविष्य अधर में फंसा है। इसको लेकर कश्मीर से कन्याकुमारी तक सियासी गलियारों में गरमाहट देखने को मिल रही है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेजी से जारी है। इस पूरे प्रकरण को लेकर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग यानी एनएमसी सवालों में घिर गई है और उसकी भूमिका पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
माता Vaishno Devi Medical College में एमबीबीएस संचालित करने की अनुमति रद्द होने से फंसे छात्र!
ऐसे तमाम छात्र जिन्होंने एमबीबीएस कोर्स की पढ़ाई के लिए जम्मू के रियासी में स्थित माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया था। अब उनका भविष्य अधर में है। दरअसल, तमाम हो-हल्ला के बाद राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने कॉलेज में एमबीबीएस कोर्ट संचालित करने की अनुमति रद्द कर दी है। अब सवाल है कि जिन 50 छात्रों ने कॉलेज में दाखिला लिया था उनका क्या होगा?
इसको लेकर सवालों के अंबर लग रहे हैं। कश्मीर से कन्याकुमारी तक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। सवाल उठ रहे हैं कि कॉलेज को कोर्स की अनुमति देने के पत्र जारी करने से पहले किसने जांच की थी? इस बीच आदेश जारी कर कहा गया है कि शिक्षा हासिल कर रहे छात्रों का दाख़िला दूसरे कॉलेजों में करवाने की व्यवस्था की जाएगी। जब तक उनका दाखिला नहीं हो जाता, तब तक छात्रों का भविष्य अधर में नजर आ रहा है।
सवालों में घिरा राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग
रियासी में स्थित माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स संचालित करने की अनुमति रद्द कर एनएमसी सवालों में घिर गया है। एनएमसी ने निर्धारित मापदंड पर खरा न उतरने का जिक्र करते हुए संस्थान पर कार्रवाई की है। इससे इतर भी तममा खामियों का जिक्र सामने आया जो माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कोर्स संचालित होने की अनुमति रद्द करने का कारण बना।
इस फैसले को लेकर आयोग सवालों के घेरे में है। सीएम उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती समेत तमाम स्थानीय नेताओं ने इस फैसले का विरोध किया है। कहा जा रहा है कि यदि संस्थान में खामियां थी तो पहले इसका ध्यान क्यों नहीं रखा गया? इसकी जवाबदेही क्यों नहीं तय की गई? इससे इतर भी तमाम अन्य सवाल हैं जो एनएमसी की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।






