Vande Mataram: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार के द्वारा प्रदेश में वंदे मातरम् के शुरुआती सिर्फ दो छंद ही गाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस पार्टी के विचारधार में विश्वास रखता हूं और पार्टी की बात पर कायम हैं। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। कर्नाटक में स्वतंत्रता दिवस के एक कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् के सभी छह पद गाने की बात को खारिज़ करते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि, यह निर्णय उनकी जानकारी के बिना लिया गया था और आगे कहा कि भविष्य में किसी भी सरकारी कार्यक्रम में अब राष्ट्रगीत के शुरुआती दो ही पद गाए जाएंगे।
वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस का ऐलान
दरअसल, कांग्रेस वर्किंग कमेटी के द्वारा 19 अगस्त को ऐलान कर कहा गया था कि पार्टी अपने सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम् के 6 में से सिर्फ शुरुआती दो छंद ही गाएगी। कांग्रेस ने पिछले हफ्ते अपने 1937 के प्रस्ताव को फिर से दोहराया, जिसमें कहा कि सार्वजनिक और राष्ट्रीय कार्यक्रम में वंदे मातरम् के केवल पहले दो पद ही गाए जाने चाहिए। बता दें कि यह फैसला 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के गायन को लेकर हुए विवाद के बाद लिया गया। जिसके बाद केन्द्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की ओर से कांग्रेस पर वंदे मातरम् के अपमान का आरोप लगाया गया। जिसपर अबतक भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी का दौर जारी है।
वंदे मातरम् के पूरे 6 छंद गाना अनिवार्य
मालूम हो कि केन्द्र में प्रेवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल ऑनर (अमेंडमेंट) बिल जुलाई 2026 में लाया गया। इसमें ‘वंदे मातरम’ के पूरे 6 छंद को आधिकारिक संस्करण बताया गया है। जिसे राज्यसभा ने 29 जुलाई और लोकसभा ने 30 जुलाई 2026 को पूर्ण सहमति से पास किया। इसके बाद 11 अगस्त को यह कानून बना। जिसका मकसद स्पष्ट है कि ‘वंदे मातरम’ को 1971 के कानून के तहत कानूनी सुरक्षा प्रदान करना रहा है। इसमें किए गए संशोधन में खासतौर पर कुछ बातों को ध्यान रखना जरुरी है , जिनमें जो व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकता है या उसके गायन में शामिल सभा में अवरोध डालता है, उसे 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है।







