Yasin Malik: दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट यानी जेकेएलएफ चीफ मोहम्मद यासीन मलिक ने कश्मीरी पंडित सरला भट्ट की हत्या में खुद के शामिल होने से इनकार किया है। यह बात स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की तरफ से जून में श्रीनगर की एक स्पेशल एनआईए कोर्ट में 737 पेज की चार्जशीट फाइल करने के दो महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद सामने आई है।
Yasin Malik का Sarla Bhat की हत्या से इनकार
स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की चार्जशीट में यासीन मलिक को सरला भट्ट के अपहरण और हत्याकांड का मुख्य आरोपी बताया गया है। हालांकि, अब मलिक की ओर से दावा किया गया है कि, उन पर लगे आरोप असली पुलिस जांच के बजाय मनगढ़ंत कहानी जैसे प्रतीत होते हैं। उनकी मानें तो यह केस उन्हें फंसाने के लिए दशकों बाद बनाया गया था। मलिक का दावा है कि उन्हें कश्मीरी पंडित नर्स की हत्या के बारे में फरवरी 1991 में पता चला। अपने हलफनामे में मलिक ने सरला भट के अपहरण और हत्या में किसी भी तरह की भूमिका से साफ इनकार किया है।
मलिक ने अपने हलफनामे में कहा कि अप्रैल 1990 में सरला भट की हत्या के समय वह गंभीर रूप से घायल था। उसकी शारीरिक हालत खराब थी। वह बेहोश था और उसका इलाज चल रहा था। उन्होंने दावा किया कि जो व्यक्ति अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा हो, उसके लिए इस अपराध की योजना बनाना नामुमकिन है।
यासीन मलिक ने कोर्ट से मौत की सजा क्यों मांगी?
यासीन मलिक ने साफ तौर पर मुकदमे आगे से लड़ने से इनकार करते हुए कोर्ट से अपने लिए मौत की सजा की मांग की है। अपने हलफनामे में मलिक ने दावा किया कि उन्होंने इस्तखारा किया था। बता दें कि यह एक इस्लामिक प्रार्थना है, जिसका इस्तेमाल किसी अहम फैसले से लेने पहले अल्लाह से मार्गदर्शन मांगने के लिए किया जाता रहा है। इसके अलावा हलफनामे में 60 साल के मलिक नेअपनी पत्नी मुशाल हुसैन से शादी खत्म करने का फैसला बताया है। इसकी वजह को लेकर उन्होंने बताया है कि वे लंबी कैद और पिछले 8 साल से परिवार से बातचीत नहीं कर पाए हैं।
मलिक की मानें तो उन्हें जेल में फोन कॉल या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा नहीं दी गई हैं। मलिक ने हलफनामे में अपनी बेटी रजिया सुल्ताना को याद किया है। बता दें कि यासीन मलिक ने तारीख 2 सितंबर 2026 दिन बुधवार को श्रीनगर की एक अतिरिक्त सत्र अदालत (जो टाडा/पोटा मामलों की सुनवाई करती है) में अपने वकील के जरिए 25 पेज का हलफनामा दायर कर खुद को बेगुनाह बताते हुए 1990 के सरला भट हत्याकांड मामले में अपने लिए मौत की सजा की मांग की है।







