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Geeta Ka Gyaan: दुखों को सर्वश्रेष्ठ मित्र क्यों कहते हैं भगवान श्री कृष्ण? सार जानकर कष्टों से मिलेगी मुक्ति

Geeta Ka Gyaan: भगवान श्री कृष्ण की लीला पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। भगवान का जन्म द्वापर युग में प्रेम को जग का पाठ पढ़ाने के लिए हुआ था। भगवान श्री कृष्ण अपनी लीलाओं से सबका मन मोह लेते हैं। वहीं भगवान ने गीता में कई सारी बातों का उल्लेख भी किया है। भगवान श्री ...

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By: Sriya Sri

Published: जनवरी 14, 2023 2:16 अपराह्न

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Geeta Ka Gyaan: भगवान श्री कृष्ण की लीला पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। भगवान का जन्म द्वापर युग में प्रेम को जग का पाठ पढ़ाने के लिए हुआ था। भगवान श्री कृष्ण अपनी लीलाओं से सबका मन मोह लेते हैं। वहीं भगवान ने गीता में कई सारी बातों का उल्लेख भी किया है।

भगवान श्री कृष्ण गीता में लोगों को जीवन जीने की सीख दी है। भगवान कर्म, धर्म और प्रेम का पाठ लोगों को पढ़ाते हैं। बता दें, गोबिंद ने गीता का उपदेश महाभारत की युद्ध में अर्जुन को दिया था। तब से लेकर आज तक गीता मानव के लिए बेहद उपयोगी है। उन्हें अपने हर प्रश्न का उत्तर गीता से मिलता है। बता दें, श्रीमद्भागवत गीता हिंदू धर्म का सबसे पवित्र ग्रंथ है। इसमें भगवान ने कई सारी बातों का उल्लेख किया है। इसमें इन्होंने बताया है कि दुख व्यक्ति का सबसे बड़ा मित्र है। तो आइए जानते हैं गीता में क्या कहना चाहते हैं भगवान।

दुख है व्यक्ति का सबसे बड़ा मित्र

भगवान श्री कृष्ण ने व्यक्ति के जीवन की कई बातों का उल्लेख गीता में किया है। इन्होंने बताया है कि दुख व्यक्ति का सर्वश्रेष्ठ मित्र है। क्योंकि दुख होने पर व्यक्ति भगवान के शरण में जाता है। भगवान को स्मरण करता है। व्यक्ति ईश्वर की खोज में तल्लीन हो जाता है। इससे उस पर देवी देवताओं की कृपा बरसती है।

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नकारात्मक विचारों को करना चाहिए नजरअंदाज

भगवान श्री कृष्ण कहते हैं जीवन में उतार चढाव आना जैसे स्वाभाविक है। इसी तरह मन में नकारात्मक विचारों का आना भी निश्चित है। इसलिए व्यक्ति को अपने मन को संतुलित करने की जरूरत है। जिससे वो इन विचारों को महत्व ही न दें। इससे इस तरह का विचार कभी भी व्यक्ति का कुछ नहीं बिगाड़ सकता है।

सफलता पाने पर न करें अहंकार

भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि कभी भी व्यक्ति को अहंकार नहीं करना चाहिए। वहीं जो व्यक्ति सफलता को पाकर अहंकार करने लगता है। वो व्यक्ति कभी जीवन में सफल नहीं हो पाता है। समझदार और बुद्धिमान व्यक्ति वही है जो सफलता पाकर अहंकार न करे।

भाग्य पर न छोड़ें निर्णय

भगवान ने गीता में उल्लेख किया है कि जो व्यक्ति कर्म नहीं करता है। वही सभी चीजों को अपने भाग्य पर छोड़ देता है। वो व्यक्ति कभी आगे नहीं बढ़ सकता है। समझदार और कर्तव्यवान व्यक्ति वही है जो कर्म और मेहनत से लक्ष्य को प्राप्त करना जानता है। वो कभी अपनी चीजों को भाग्य पर नहीं छोड़ता है।

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Sriya Sri

मेरा नाम श्रीया श्री है। मैं पत्रकारिता अंतिम वर्ष की छात्रा हूं। मुझे लिखना बेहद पसंद है। फिलहाल मैं डीएनपी न्यूज नेटवर्क में कंटेंट राइटर हूं। मुझे स्वास्थ्य से जुड़ी कई चीजों के बारे में पता है और इसलिए मैं हेल्थ पर आर्टिकल्स लिखती हूं। इसके अलावा मैं धर्म, लाइफस्टाइल, एस्ट्रोलॉजी और एजुकेशन के विषय में भी आर्टिकल लिखती हूं।
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